उदंडता का दंड

उदंडता का दंड

सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने विपक्ष के छह सांसदों ने निलंबित कर दिया। सांसदों द्वारा सदन में किए गए हंगामे के बाद महाजन ने यह क़डा कदम उठाया। सांसदों ने अध्यक्ष के पास जाकर सदन के वेल में दस्तावेज भी फेंके थे। सुमित्रा महाजन ने पहले सांसदों को अपने स्थान पर लौटने को कहा, परंतु लगातार निवेदन के बावजूद सांसद अपनी हरकतों से बा़ज नहीं आए। आखिरकार महाजन को पांच दिनों के लिए सांसदों को निलंबित करना प़डा। पिछले ही दिन पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने राष्ट्रपति के रुप में अपने आखिरी संबोधन में सांसदों से नसीहत दी थी कि सदन की कार्यवाई को कम से कम बाधित किया जाए और महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक बहस हो परंतु कामकाज ठप्प न हो जाए। निलंबित सभी सांसद कांग्रेस के सदस्य हैं। उन्होंने फाइलों को उछाला, कागज फा़डे, और शर्मनाक तरीके से अध्यक्ष की तरफ उन्हें फैंका। इन सांसदों की मांग थी कि हिंसक भी़ड का निशाना बन रहे दलितों और अल्पसंख्यकों के मसले पर बहस की जाए और इस विषय पर सदन में चर्चा के सरकार भी तैयार थी और अध्यक्ष ने भी इस पर चर्चा करने के लिए मंजूरी दे दी थी फिर सांसदों का इस तरह का व्यवहार निंदनीय है। सांसद जिस तरह बेवजह तैश में आए और अशोभनीय आचरण की हद पार कर गए उससे तो यही लगता है कि वे घर से तय करके आए थे कि सदन में हंगामा ही करना है। हैरत नहीं कि उनका उग्र और शर्मनाक आचरण कांग्रेस की उसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो जिसके तहत संसद में हर दिन किसी न किसी मसले को उठाकर सदन की कार्यवाही बाधित करने को लक्ष्य बनाया गया है। यह पहली बार नहीं जब विपक्ष की ओर से ऐसे किसी मसले पर संसद में हंगामा किया गया हो जिस पर सत्तापक्ष चर्चा के लिए सहमत हो। ऐसा अब आए दिन होता है और कई बार तो चर्चा का नोटिस दिए बिना संबंधित मसले पर बहस की जिद पक़ड ली जाती है। आखिर विपक्ष ने यह क्यों मान लिया है कि उस पर किसी तरह के नियम-कानून लागू नहीं होते? यदि ऐसा कुछ नहीं है तो फिर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बगैर चर्चा करने या सरकार से जवाब मांगने के बहाने संसद और देश का वक्त जाया करने वाली हरकतें क्यों की जाती हैं? बहुत दिन नहीं हुए जब कांग्रेसी सांसद सदन में नारे लिखी तख्तियां लेकर जाते थे और इसके लिए अतिरिक्त कोशिश करते थे कि वे लोकसभा टीवी के कैमरों में कैद हो जाएं। लोकसभा अध्यक्ष का यह कदम अनिवार्य था और इसके लिए बेलगाम सांसद ही जिम्मेदार हैं।

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