कमजोर पड़ती कांग्रेस

कमजोर पड़ती कांग्रेस

बिहार के राजनैतिक समीकरणों में हुए बदलावो से केवल महागठबंधन नहीं टूटा है बल्कि राष्ट्रीय जनता दाल के साथ साथ कांग्रेस की लाचारी भी उजागर हुई है। नीतीश कुमार ने महागठबंधन को ठुकराकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थामना बेहतर समझा। महागठबंधन के टूटने का कारण कोई भी रहा हो लेकिन कांग्रेस ने समय रहते इस गठबंधन को बचने के लिए भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कांग्रेस की लापरवाही से राष्ट्रीय जनता दाल और जनता दल (यु) के बीच की दूरियां ब़ढती गई और आखिरकार कांग्रेस और राजद सरकार से बाहर कर दी गईं। राहुल गाँधी ने गठबंधन टूटने के कुछ ही घंटों बाद पत्रकारों से यह तो कह दिया की नीतीश कुमार पिछले कुछ अरसे से भाजपा से रिश्ता जो़डने की कोशिश में लगे हुए थे। राहुल के इस बयान से उनकी पार्टी की नाकामी भी सामने आती है। सच तो यह है की केवल बिहार ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों में भी कांग्रेस लगातार कम़जोर प़डती जा रही है। गुजरात में छह विधायक पार्टी छो़ड चुके हैं और चुनाव की तैयारियों में जुटी कर्नाटक कांग्रेस द्वारा उठाये जा रहे मुद्दे भी कांग्रेस की लोकप्रियता पर सवाल उठ रहे हैं्। बिहार में कांग्रेस की एक ब़डी गलती यह भी है की विकास का समर्थन कर रहे नितीश कुमार का साथ छो़डकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में फसे तेजस्वी यादव का साथ देना बेहतर समझा। कांग्रेस को यह नहीं समझ आ रहा है की पिछले आम चुनावों में पार्टी की बुरी स्थिति केवल भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से हुई थी। अभी भी कांग्रेस अपने साथियों को चुनने में गलती कर रही है जिसका खामिया़जा उसे वर्ष २०१९ के चुनाव में भुगतना प़ड सकता है। कांग्रेस नेतृत्व की निर्णयहीनता और सुस्ती का परिचय पहले भी हमें मिल चूका है। जिस तरह से गोवा में सबसे ब़डे दल के रूप में उभरने के बावजूद कांग्रेस सरकार बनाने में विफल रही उससे कांग्रेस नेतृत्व द्वारा समय पर सही फैसला लेने में विफलता ऩजर आई। मणिपुर में भी कांग्रेस के सुस्त रवैये के कारण सत्ता हाथ से गई। बिहार के महागठबंधन को बचने के लिए कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। समस्या केवल किसी एक राज्य की नहीं है बल्कि कांग्रेस को अपने आलाकमान के ढांचे को सुधारने की जरूरत है। राहुल गाँधी को ़जमीनी समस्याओं को समझकर पार्टी की रणनीति बनाने के लिए आक्रामक रवैया अपनाने की जरूरत है। अगर यही सुस्त रवैया बरकरार रहा तो भाजपा को अगले आम चुनाव में जीत हासिल करने के लिए बहुत मेहनत नहीं करनी प़डेगी। कांग्रेस को अपने कार्यकर्ता को एक जुट कर चुनावी तैयारियों के लिए कमर कसनी चाहिए।

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