आतंकवाद का बढ़ता जाल

आतंकवाद का बढ़ता जाल

सोमवार रात को ब्रिटेन प्रमुख शहर मैनचेस्टर में आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आत्मघाती हमले में अभी तक बाइस लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसी वर्ष मार्च में वेस्टमिनिस्टर स्थित संसद परिसर के पास हुए आतंकी हमले में और सोमवार रात हुए हमले में एक गौर करने वाली समानता है कि दोनों ही हमलों को ब्रिटिश नागरिकों ने अंजाम दिया है। वेस्टमिनिस्टर में हुए हमले को ५२ वर्षीया खालिद मसूद और सोमवार को हुए हमले को मैनचेस्टर के ही युवक सलमान अबेदी ने अंजाम दिया। जिस तरह से यूरोप के अनेक देशों में युवकों को इंटरनेट के जरिए गुमराह कर अपने संगठन से जु़डने के लिए आकर्षित करने में आईएसआईएस को सफलता मिल रही है यह विश्व के सभी नेताओं को चिंतित कर रहा है। क्या ऐसा होने से उसे रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं? क्या आज का युवक इतना कमजोर है कि कोई भी उसकी बुद्धि भ्रष्ट करने में आसानी से सफल हो सकता है ? यूरोप के देश पिछले कुछ सालों से आईएस के निशाने पर बने हुए हैं और अपने आतंकी मंसूबों को अंजाम देने के लिए जिस तरह से आईएस युवाओं का इस्तेमाल कर रहा है उससे यह तो सा़फ है कि निकट भविष्य में ऐसे और हमलों से इंकार नहीं किया जा सकता। आज इंटरनेट पर सभी प्रकार की सामग्री उपलब्ध है और युवाओं तक कट्टरवाद को ब़ढावा देने वाली सामग्री पहुँचाना कठिन नहीं रहा है। अभिभावकों, शिक्षकों और साथ ही युवकों की भी ि़जम्मेदारियाँ ब़ढ गयी हैं कि अगर किसी जानकार को कट्टरवाद की ओर आकर्षित होता देखें तो तुरंत निजी स्तर पर ऐसे युवकों को सही दिशा दिखलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। उन्हें जागरूक करें कि जिस मकसद की ओर वह आकर्षित हो रहे हैं वह असल में एक खतरनाक खाई है जिससे वापस लौट पाना नामुमकिन है। ऐसे हमलों से विश्व की लाचारी सामने आती है। जिस तरह से किसी भी पिंजरे में कैद शेर को भी छोटा सा चूहा परेशान कर सकता है उसी तरह विश्व के सभी देश अपने सुरक्षा तंत्र को कितना भी मजबूत कर लें लेकिन ऐसे हमलों से पूर्ण रूप से सुरक्षित होना असंभव हो चुका है। भारत विश्व का सबसे युवा देश है और हमारे देश में भी आईएस की दस्तक सुनाई देती रही है। कश्मीर में पत्थरबा़जी के अलग-अलग प्रसंगों पर युवकों के हाथों में आईएस के झंडे ऩजर आये हैं। कुछ युवक तो आईएस के संगठन का हिस्सा बनने के लिए ईराक और सीरिया तक भी पहुँच गए हैं। अगर हम हमारे युवकों को समय रहते सही दिशा दिखाने में सक्षम नहीं रहे तो वह दिन दूर नहीं जब विश्व के अन्य इलाकों की ही तरह भारत भी आईएस का एक युद्ध क्षेत्र बन जायेगा। इसके लिए हमें न केवल युवाओं को आतंकवाद की हानि से जागरूक करना होगा और ऐसे किसी भी व्यक्ति पर निरंतर निगरानी रखनी होगी जिसने किसी भी तरह से कट्टरवाद के प्रति रुझान दिखाया है। भविष्य में कोई भी व्यक्ति उतना ही सुरक्षित होगा, जितना वह जागरूक होगा। आतंकवाद से पूरी तरह से निजात पाना शायद अब संभव होना मुश्किल है।

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