पौधरोपण की सही दिशा

पौधरोपण की सही दिशा

पांच जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर देश भर में पौधा रोपण के अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। कुछ कार्यक्रम इतने विशाल स्तर पर आयोजित किए गए कि उनमंे एक लाख से भी अधिक पौधों का पौधरोपण किया गया है। ऐसे कार्यक्रमों के सफल आयोजन के बाद अब आगामी मानसून से पहले सरकार को भूमि में लगाए गए पौधों को उगने के लिए बेहतर अवसर देना होगा। शहरी विकास विभाग को देश के शहरों में पौधरोपण के अभियान के दौरान लगाए गए पौधों की शुरुआती दिनों में देख-रेख के लिए भी जागरुकता फैलानी होगी। शहरों को हरा-भरा बनाए रखने के लिए सरकार के साथ नागरिकों को भी अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है। कई बार देखा गया है कि शहरों में नागरिक भी इस मामले में बहुत लापरवाह होते हैं।सरकारें पौधारोपण के आयोजन तो करती हैं लेकिन जमीन में बोये जाने के बाद पौधों के उगने के प्राथमिक समय के दौरान लापरवाही बरती जाती है जिसके कारण अधिकांश पौधे कुछ ही दिनों तक जीवित रह पाते हैं। अब मानसून देश के तटीय क्षेत्रों में दस्तक दे रहा है और जल्द ही मानसून देश भर में पहुँच जाएगा। यह समय देश में सोमवार को लगाए गए पौधे के लिए अनुकूल है और अगर भारत सरकार राज्यों के साथ मिलकर कुछ दिनों तक पौधों की देखरेख का ध्यान रखें तो निश्चित रूप से कुछ वर्षों में शहरों को पुनः हरा भरा किया जा सकेगा। देश के हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी जिसकी वजह से दिल्ली और मुंबई सहित अन्य शहरों में लगातार ब़ढ रहे वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। पौधारोपण को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उल्लेखनीय कदम माना जा सकता है लेकिन अगर पौधों को बचाया ना जा सका तो एक अच्छी पहल व्यर्थ हो जाएगी। प्रतिवर्ष सरकार मानसून से पहले पौधारोपण करती रही है, लेकिन जिस तरह से इस वर्ष जागरुकता में वृद्धि हुई है और आम नागरिकों को इस आयोजन से जो़डा गया वह सराहनीय है। केंद्र सरकार के नेतृत्व में अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रमों के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लिए पेरिस जलवायु समझौते के पालन और नवीनतम ऊर्जा और प्रदूषण कम करने की दिशा को निर्धारित किया है। देश भर के शहर प्रतिवर्ष अधिक गरम होते जा रहे हैं और ऐसे में पौधरोपण से हरियाली पुनः बहाल की जा सकेगी। एक तरफ हरियाली ब़डी तो दूसरी और वायु प्रदूषण अवश्य घटेगा। साथ ही सरकार को देश-भर में फैले राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे और स़डकों के बीच में बने डिवाइडरों के बीच में पौधों को लगाने का काम भी करना चाहिए। पिछले कुछ वर्षों जब राजमार्गों की स़डकों को चौ़डा किया गया तो स़डक किनारे लगे पे़डों को कटा गया परंतु अधिकांश जगहों पर जब स़डकें बन गयी तो उनके किनारे पौधरोपण नहीं किया गया। इसी कारण देश के कई राजमार्गों के किनारे कई किलोमीटरों तक कोई पे़ड नहीं ऩजर आता है। सरकार को अब शहरी हरियाली के साथ ही राजमार्गों पर भी ध्यान देना होगा। संभव है कि अगर अगले दो वर्षों में नियमित रूप से देश में पौधरोपण अभियान को इसी तरह से किया जाए तो वर्ष २०३० तक देश की हरियाली बेहतर हो सकेगी।

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