गठबंधन के मामले में सपा अपना काम निकलते ही गिरगिट की तरह रंग बदलती है: मायावती
बसपा प्रमुख ने सपा पर बोला हमला
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लखनऊ/दक्षिण भारत। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने शनिवार को कहा कि जैसा कि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केंद्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि 'हमने इनको चवन्नी से रुपया बना दिया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है।
मायावती ने कहा कि इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिए उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं, बल्कि स्व. चौधरी चरण सिंह के परिवार का अपमान करने पर पूरे जाट समाज से भी अविलंब माफी मांगनी चाहिये तो यह उचित होगा।मायावती ने कहा कि वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपनी विरोधी पार्टियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सहयोगियों के लिए भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा है, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
मायावती ने कहा कि इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में उप्र में मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबंधन जल्द ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून, 1995 को मेरी हत्या करने के षडयंत्र के तहत मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस कांड हुआ था।
मायावती ने कहा कि फिर आगे चलकर इनके बेटे अखिलेश यादव द्वारा, पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से न दोहराने का आश्वासन देते हुए, लोकसभा का चुनावी गठबंधन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरूप न आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बसपा के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैए के कारण फिर यह गठबंधन भी टूट गया, क्योंकि डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्मसम्मान व स्वाभिमान के कारवां वाली पार्टी बसपा और उसका नेतृत्व 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अंबेडकरवादी नीतियों व सिद्धांतों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
मायावती ने कहा कि अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबंधन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि यह सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
मायावती ने कहा कि इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अपने पीडीए में से पी को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी पी को पंडितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई हितैषी नहीं रहे हैं।
मायावती ने कहा कि इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रहीं सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया, तथा न ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाए गए हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुंडों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्त्वों का ही भला हुआ है। साथ ही, इनकी सरकार में दिन छिपने के बाद हमारी बहन-बेटियां भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग उप्र के आगामी विधानसभा चुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी न आने दें, जो यह उनके हित में होगा।


