पेपर लीक पर सख्त कानून जरूरी
पेपर लीक घोर पाप है
सरकार को ठोस सुधार करने होंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने और दोषियों को दंडित करने के लिए संसद में विधेयक लाने के संबंध में जो घोषणा की है, उसमें छात्रहितों का बहुत ध्यान रखा गया है। देश में ऐसा कानून बनने के बाद पेपर लीक में लिप्त लोग यह कृत्य करने से पहले हजार बार सोचेंगे। जो पेपर लीक करते हैं, वे उसे बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं। अब केंद्र सरकार जो कदम उठाने जा रही है, उससे ऐसे लोग हतोत्साहित होंगे, क्योंकि अपराध करने के बाद उन्हें जेल और जुर्माने से दिन में तारे नजर आएंगे। पेपर लीक सिर्फ अपराध नहीं है। यह घोर पाप है। जो विद्यार्थी दिन-रात मेहनत करते हैं, उनके हक पर डाका डालने का नाम है- पेपर लीक। सरकार को परीक्षा प्रणाली की पवित्रता और विश्वसनीयता कायम रखने के लिए हर संभव कदम उठाना चाहिए। किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। कड़ी मेहनत करने के बाद जब पता चलता है कि किसी को परीक्षा से पहले ही पेपर मिल गया था, तो वह खबर वज्रपात की तरह लगती है। इससे मेहनती बच्चों की हिम्मत टूटती है और उन लोगों के हौसले बढ़ते हैं, जो पैसे, पद और पहचान की धौंस जमाते हैं। अगर कोई व्यक्ति अयोग्य है, लेकिन वह पेपर लीक के दम पर डॉक्टर बन गया तो भविष्य में क्या करेगा? वह निश्चित रूप से लोगों को मारेगा! ऐसा व्यक्ति इंजीनियर बनकर व्यवस्था का नाश करेगा और दूसरों का जीवन घोर संकट में डालेगा। पेपर लीक पहले भी होते थे, लेकिन तब आसानी से पता नहीं चलता था। अब सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री तेजी से प्रसारित होती है, जिससे जल्द ही भेद खुल जाता है।
नीट पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद दिल्ली में जिस तरह हंगामा खड़ा किया गया, उसे मामूली विरोध प्रदर्शन समझकर खारिज न करें। इसके पीछे निश्चित रूप से विदेशी शक्तियों का हाथ है। स्वार्थी तत्त्वों की फंडिंग है। सीजेपी के रूप में जो लोग इसे आगे बढ़ा रहे हैं, उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं। कथित आंदोलन में असामाजिक तत्त्वों का प्रवेश हो गया है। छात्रों के कुछ मुद्दे हो सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह छात्र-केंद्रित मामला नहीं है। वास्तव में, लोगों की कुछ कुंठाएं भी हैं, जिन्हें सीजेपी वाले भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब तो विपक्षी दल इसमें कूद पड़े हैं। देशवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बहुत उम्मीदें हैं। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी इसका प्रमाण है। इस अवधि में देश में कई काम बहुत अच्छे हुए हैं। सेवाओं का डिजिटलीकरण, लाखों शौचालयों का निर्माण, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, आतंकवाद को करारा जवाब, बेहतर परिवहन सुविधाएं, अंतरिक्ष अनुसंधान, ग्रामोत्थान, कोरोना महामारी पर विजय जैसी उपलब्धियों पर सबको गर्व होता है। पश्चिम एशिया में अशांति के बावजूद केंद्र सरकार ने भारत में ईंधन की किल्लत नहीं होने दी। वहीं, आम आदमी कुछ समस्याओं से बहुत परेशान है। शिक्षा बहुत महंगी हो गई है। सरकारी स्कूलों की हालत में कोई खास सुधार नहीं आया है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव है। सरकारी दफ्तरों में घूसख़ोरी का रोग बढ़ता ही जा रहा है। आम आदमी के लिए पुलिस का रवैया कैसा है, यह बताने की जरूरत नहीं है। युवाओं के पास ऐसा कोई हुनर नहीं है, जिससे वे कमाई कर सकें। उनके मन में यह बात दृढ़ता से बैठी हुई है कि 'हमें तो पढ़-लिखकर सिर्फ सरकारी नौकरी करनी है।' जब ये लोग देखते हैं कि नेता और अधिकारी भरपूर सुविधाओं का उपभोग कर रहे हैं, उनके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं, विदेशों में छुट्टियों का लुत्फ उठा रहे हैं तो मन में कुंठा पैदा होती है। कुछ शातिर दिमाग उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना जानते हैं। वे देर-सबेर भीड़ जुटा लेते हैं। जंतर-मंतर पर लगे जमावड़े में ज्यादातर लोगों का नीट से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनके मन में छिपी कुंठा उन्हें वहां ले आई। बाकी काम शातिर दिमागों ने कर दिया। केंद्र सरकार को धरातल पर ठोस सुधार करने होंगे।

