प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई

देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली

प्रधानमंत्री ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई

Photo: @BJP4India X account

जींद/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी की।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद की इस गौरवशाली भूमि से आप सभी को मेरी राम-राम। आज इस पवित्र धरती पर आकर मन गद्गद हो गया है। यो कोई साधारण धरती नहीं सै, यो धरती इतिहास, वीरता, धर्म और गौरव की धरती सै।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेरे लिए तो जींद आना पुरानी यादों का झरोखा खोलने जैसा है। कई दशक पहले, मैं संगठन के काम से पहली बार जींद आया, फिर आप लोगों ने मुझे जो अपनत्व दिया, प्रेम दिया, वो मैं आज आजतक भुला नहीं हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इतने वर्षों में जींद के घी और जींद के घेवर तो नहीं बदले, लेकिन जींद के तेवर बदल गए हैं। आज जींद भाजपा-राजग के सुशासन मॉडल की तस्वीर बन रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में पूरा हरियाणा ही विकास की नई पटरी पर चल पड़ा है। आज का यह कार्यक्रम डबल इंजन की भाजपा सरकार के इसी मिशन को नई ऊर्जा से भर रहा है। आज जींद और हरियाणा का नाम इतिहास पन्नों में दर्ज हो हो गया है। आज यहां देश को पहली हाइड्रोजन ट्रेन मिली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में पहली ट्रेन बॉम्बे से ठाणे के बीच चली थी। वैसे ही भविष्य में जब भी हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र आएगा, तो जींद के सोनीपत का और हरियाणा का नाम आएगा ही आएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक के अन्य प्रोजेक्ट्स भी हरियाणा को मिले हैं। इसमें रेलवे के, हाईवे के अनेक नए प्रोजेक्ट हैं, हमारी विरासत से जुड़े प्रोजेक्ट्स हैं और 2 मेडिकल कॉलेज भी हरियाणा की सेवा के लिए समर्पित हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आज जींद वालों से कुछ मांगने आया हूं। क्या इस सफाई और स्वच्छता के लिए मोदी का आना जरूरी है? अगर जींद और हरियाणा के लोग तय कर लें कि अब हम गंदगी नहीं करेंगे तो जींद और हरियाणा अभी गंदा हो ही नहीं पाएगा। स्वच्छता को हमारा स्वभाव बनाएंगे। स्वच्छता को हमारा संस्कार बनाएंगे। हम स्वच्छता को इसी तरह अपनी हर दिन की जिंदगी का हिस्सा बनाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम रेलवे के इतिहास पर नजर डालें तो पाते हैं कि 19वीं सदी के रेलवे की पहचान स्टीम इंजन से थी। 20वीं सदी की पहचान डीजल और बिजली से चलने वाली रेल बनी और अब 21 वीं सदी की रेल हाइड्रोजन से चलने वाली है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में हाइड्रोजन ट्रेन अभी अभी अस्तित्व में आई है। अभी दुनिया के तीन या चार देश ही हैं, जिनके पास हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की सामर्थ्य है। भारत की इस ट्रेन की सामर्थ्य के बारे में सुनकर आपको और एक-एक हिंदुस्तानी को गर्व होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जींद से चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन है। यह ट्रेन 3200 हॉर्स पॉवर की है और सबसे ताकतवर ही नहीं, बल्कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन सबसे लंबी भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साल 2014 में देश का बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा था, जहां हमारी ट्रेनें डीजल से चलती थीं। अब आप सोचिए, अगर डीजल आना बंद हो गया होता तो डीजल से चलने वाली ट्रेन कैसे चलती? देश संकट में आ जाता!

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह 2014 की स्थिति नहीं है। यह मोदी है, बहुत पहले सोचता भी है और समस्या के समाधान के रास्ते भी जमीन और उतारता है। भारतीय रेलवे के बिजलीकरण की शुरुआत सन् 1925 में हुई थी, यानी करीब 100 साल पहले। सन् 1925 से लेकर 2014 तक करीब 90 साल में पूरे देश के रेल नेटवर्क का करीब 30 प्रतिशत ही बिजलीकरण हो पाया था। सत्तर प्रतिशत क्षेत्र डीजल से चलता था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत के करीब 99 प्रतिशत रेल नेटवर्क का बिजलीकरण हो चुका है। हरियाणा में रेल नेटवर्क का शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो गया है। इस वजह से लड़ाई होने के बावजूद भी, तेल का संकट होने के बाद भी, भारत की रेल रुकी नहीं है, भारत की विकास की गाड़ी अटकी नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रेल हो, रोड हो... कनेक्टिविटी का ऐसा काम सुविधा भी देता है और विकास की गति भी कई गुना बढ़ा देता है। आज जींद इतने सारे हाईवे से जुड़ रहा है। अभी इस मंच से भी तीन बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। दिल्ली-अमृतसर-काटना एक्सप्रेस वे के हरियाणा वाले हिस्से का लोकार्पण हुआ है, जींद-गोहाना नेशनल हाईवे भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। इसके अलावा अंबाला-काला अंब फोरलेन से भी हरियाणा और हिमाचल के लोगों को बहुत सुविधा होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि अभी मैं कुछ दिन पहले ही इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा से लौटा हूं। वहां भारत ने अनेक समझौते किए हैं, जिनकी बहुत चर्चा हुई है। एक विषय ऐसा है, जिस पर उतनी बात नहीं हुई है। यह विषय मेरे देश के और विशेषकर हरियाणा के युवाओं से जुड़ा हुआ है। वो विषय है खेलकूद।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में वहां की सरकारों से खेलकूद को लेकर मेरी व्यापक चर्चा हुई। इन दोनों देशों के साथ मिलकर हम खेलकूद इंडस्ट्री, खिलाड़ियों की ट्रेनिंग आदि मामले में हम बहुत सारे काम करने वाले हैं, इससे देश के और हरियाणा के खिलाड़ियों को बहुत लाभ होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने नई राष्ट्रीय खेलकूद नीति ... 'खेलो भारत नीति' भी बनाई है। खेलो इंडिया अभियान से लेकर टॉप्स स्कीम तक आज खिलाड़ियों को अभूतपूर्व सुविधाएं मिल रही हैं।

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