विश्वसनीयता की विरासत, सेवा का संकल्प
आज 'दक्षिण भारत राष्ट्रमत' का स्थापना दिवस है
यह मात्र एक अखबार नहीं, बल्कि विश्वसनीयता का प्रतीक है
'दक्षिण भारत राष्ट्रमत' के स्थापना दिवस के अवसर पर, हम उन सभी बधाई संदेशों और शुभकामनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हैं, जो हमें प्राप्त हुए हैं। दो दशक से अधिक समय से बेंगलूरु में और डेढ़ दशक से चेन्नई में, हम निरंतर हिंदी माध्यम से दक्षिण भारत के पाठकों तक समाचार और विचार पहुंचा रहे हैं।
यह मात्र एक अखबार नहीं, बल्कि विश्वसनीयता का प्रतीक और समाज को जोड़ने वाला सेतु है। हमें गर्व है कि इस यात्रा में कभी विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया। हर खबर, हर विश्लेषण और हर रिपोर्ट के पीछे हमारा एकमात्र उद्देश्य रहा है- पाठकों को सच्चाई से रूबरू कराना और उन्हें सूचित, जागरूक तथा एक-दूसरे से जुड़ा हुआ महसूस कराना।भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती है। वह लोगों को जोड़ना भी सिखाती है। जब कोई भाषा हृदय से बोली जाती है तो वह क्षेत्रवाद, भाषावाद समेत कई दीवारों से ऊपर उठ जाती है। दक्षिण भारत में हिंदी के मार्ग में चुनौतियां कम नहीं रही हैं।
इनके कारण कई लोग हिंदी को अपनाने में संकोच महसूस करते हैं। फिर भी, हमने इसे अपनी तपस्या माना। हम बिना किसी शोर के, बिना किसी समझौते के लगातार सेवा कर रहे हैं, क्योंकि हमें विश्वास है कि भाषा कोई प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि एक-दूसरे को निकट लाने का नाम है।
भारत की सभी भाषाएं फूलों की तरह हैं- प्रत्येक का अपना रंग, सुगंध और सुंदरता है। हिंदी उन सबको एक सूत्र में पिरोने वाला धागा है। जब ये फूल एक माला में गूंथे जाते हैं तो अनुपम सुंदरता उभरती है। 'दक्षिण भारत राष्ट्रमत' भी ठीक यही कार्य कर रहा है- व्यक्ति को समाज से, समाज को राष्ट्र से और राष्ट्र को विश्व से जोड़ रहा है। हम सांस्कृतिक पुल का निर्माण कर रहे हैं, जहां उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम की कोई दूरी नहीं रह जाती है।
इस स्थापना दिवस पर फिर से संकल्प लेते हैं कि आने वाले वर्षों में भी हम इसी तरह निष्पक्षता, साहस और सकारात्मकता के साथ पाठकों की सेवा करते रहेंगे। आपका स्नेह, समर्थन और सुझाव ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी हैं। आइए, हम सब मिलकर सुंदर, सफल, सशक्त, समृद्ध और एकजुट भारत का निर्माण करें।
'दक्षिण भारत राष्ट्रमत' परिवार


