केंद्र सरकार ने एआई-जनित और डीपफेक सामग्री पर नियम सख्त किए

चिह्नित सामग्री को तेज़ी से हटाना अनिवार्य किया

केंद्र सरकार ने एआई-जनित और डीपफेक सामग्री पर नियम सख्त किए

Photo: PixaBay

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। केंद्र सरकार ने मंगलवार को एआई-जनित और सिंथेटिक सामग्री, जिनमें डीपफेक भी शामिल हैं, को संभालने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर कड़े नियम लागू किए हैं। इसके तहत कहा गया है कि एक्स और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म किसी सक्षम प्राधिकरण या अदालत द्वारा चिह्नित की गई ऐसी सामग्री को तीन घंटे के भीतर हटाने के लिए बाध्य होंगे।

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सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (इंटरमीडियरी दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधनों को अधिसूचित किया है, जिनमें एआई-जनित और सिंथेटिक सामग्री की औपचारिक परिभाषा दी गई है। ये नए नियम 20 फ़रवरी, 2026 से लागू होंगे।

संशोधनों में 'ऑडियो, दृश्य या ऑडियो-विज़ुअल जानकारी' और 'सिंथेटिक रूप से जनित जानकारी' की परिभाषा दी गई है, जिसके अंतर्गत एआई द्वारा बनाई गई या परिवर्तित की गई ऐसी सामग्री शामिल है, जो वास्तविक या प्रामाणिक प्रतीत होती है। हालांकि, नियमित संपादन, सुगम्यता (एक्सेसिबिलिटी) में सुधार तथा सद्भावना में किया गया शैक्षणिक या डिज़ाइन संबंधी कार्य इस परिभाषा से बाहर रखे गए हैं।

मुख्य बदलावों में सिंथेटिक सामग्री को 'जानकारी' के रूप में मानना शामिल है। एआई-जनित सामग्री को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अवैध कृत्यों के निर्धारण के लिए अन्य जानकारी के बराबर माना जाएगा।

एक गज़ट अधिसूचना के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा है कि प्लेटफॉर्म्स को सरकारी या न्यायालय के आदेशों पर तीन घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी, जो पहले 36 घंटे थी।

उपयोगकर्ता शिकायत निवारण की समयसीमा को भी कम कर दिया गया है। नियमों के अनुसार एआई-जनित सामग्री का अनिवार्य लेबलिंग करना आवश्यक है। ऐसे प्लेटफ़ॉर्म जो सिंथेटिक सामग्री बनाने या साझा करने की सुविधा प्रदान करते हैं, उन्हें सुनिश्चित करना होगा कि यह सामग्री स्पष्ट और प्रमुख रूप से लेबल की गई हो और तकनीकी रूप से संभव होने पर स्थायी मेटाडेटा या पहचानकर्ता के साथ एम्बेड की गई हो।

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