दो बड़ी चुनौतियां

कई परिवार ऐसे हैं, जहां दंपति एक से ज्यादा संतान नहीं चाहते

दो बड़ी चुनौतियां

युवाओं को लिव-इन रिलेशनशिप भी लुभा रही है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दंपतियों की संतानों की संख्या और लिव-इन रिलेशनशिप के बारे में जो टिप्पणी की है, उससे समाज के सामने उभर रहीं दो बड़ी चुनौतियों की गंभीरता का पता चलता है। ये दोनों ही युवाओं के जीवन के साथ जुड़ी हुई हैं। आखिर क्या वजह है कि आज का युवा विवाह और संतानोत्पत्ति को प्राथमिकता नहीं देना चाहता? लिव-इन रिलेशनशिप, जिसे कभी अमेरिकी समाज की विकृति माना जाता था, की चपेट में भारत के महानगरों से लेकर कस्बों तक के कई युवा आ गए हैं! प्राय: युवाओं से उम्मीदें बहुत बड़ी की जाती हैं, लेकिन उन्हें वैसा माहौल नहीं दिया जाता। भारत का युवा विवाह और संतानोत्पत्ति से इसलिए दूर जा रहा है, क्योंकि खर्चों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। सोशल मीडिया ने 'भव्य शादियों' का बहुत ज्यादा महिमा-मंडन कर दिया है। एक प्रसिद्ध उद्योगपति के बेटे का विवाह, जिसके कार्यक्रम हफ्तों चले थे, के वीडियो अब तक वायरल हो रहे हैं। कोई रिश्तेदार 'भव्य शादी' करता है तो अन्य परिवारों पर भी ऐसा करने का दबाव आ जाता है। वहीं, अब विवाह में खानदान, गुण, स्वभाव, चरित्र आदि की जगह पैसे का बोलबाला बहुत हो गया है। कौन कितना कमाता है, कितनी जायदाद है, किसे क्या मिलेगा - जैसे सवालों ने विवाह को एक पवित्र रिश्ते की जगह सौदेबाजी बना दिया है। हाल के वर्षों में तलाक के ऐसे मामले बहुत चर्चा में रहे हैं, जब किसी पुरुष को जीवनभर की कमाई अपनी पत्नी को देनी पड़ी। मुकदमेबाजी में जो परेशानी हुई, सो अलग। सोशल मीडिया पर ऐसा कोई मामला वायरल होता है तो आम लोगों में यह धारणा बन जाती है कि पूरे देश में यही हो रहा है। पुरुषों पर इसका गहरा असर होता है। वे सोचते हैं- 'इतनी पढ़ाई, मेहनत, कमाई और संघर्ष के बाद यह नतीजा निकल सकता है तो हम विवाह क्यों करें?' जब विवाह नहीं होगा तो संतानोत्पत्ति का प्रश्न ही नहीं पैदा होता।

Dakshin Bharat at Google News
कई परिवार ऐसे हैं, जहां दंपति एक से ज्यादा संतान नहीं चाहते। कुछ दंपति तो संतान ही नहीं चाहते। 'डबल इनकम, नो किड्स' (डिंक) की बातें हो रही हैं। इन दंपतियों के बारे में कोई भी राय बनाने से पहले इनका पक्ष जरूर सुना जाना चाहिए। इन्हें बच्चों से कोई घृणा नहीं है। इनका कहना है- 'हम अपने बच्चों से इतना प्यार करते हैं कि उन्हें इस धरती पर नहीं लाना चाहते!' इनकी शिकायतों की सूची बहुत लंबी है, जैसे- 'सरकारी स्कूलों की हालत अच्छी नहीं है, निजी स्कूलों की फीस बहुत ज्यादा है, पढ़ाई-लिखाई के बाद रोजगार की कोई गारंटी नहीं है, अच्छी चिकित्सा सुविधाएं नहीं हैं, निजी अस्पताल बहुत महंगे हैं, शहर में मकान खरीदना बहुत महंगा है, सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार है, अदालतों से इन्साफ पाने में उम्र निकल जाती है, आम आदमी का जीवन बहुत मुश्किल है।' इसका असर कुल प्रजनन दर (टीएफआर) पर दिखाई दे रहा है। इन दंपतियों की चिंताओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अगर चाहते हैं कि नई पीढ़ी वंशवृद्धि करे तो उक्त समस्याओं का समाधान करना होगा। जब आज का युवा देखता है कि विवाह और संतानोत्पत्ति के बाद इतनी समस्याएं आने वाली हैं तो वह या तो विवाह नहीं करेगा, अगर करेगा तो ज्यादा से ज्यादा एक संतान चाहेगा या फिर डिंक का समर्थक बन जाएगा। इन सबके बीच लिव-इन रिलेशनशिप भी उसे लुभा रही है। कई जगह इसके भयानक नतीजे सामने आए हैं। पश्चिमी देशों में जहां लिव-इन रिलेशनशिप का चलन ज्यादा है, वहां परिवार टूट रहे हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान यह है कि हालात को आसान करें, विवाह को आसान करें, व्यवस्थाओं को आसान करें। ये काम सिर्फ सरकारों के भरोसे नहीं हो सकते। समाज को भी आगे आना होगा।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download