केआईआईटी के दीक्षांत समारोह में नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया
'केआईआईटी और केआईएसएस शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के स्तंभ हैं'
विद्यार्थियों को निरंतर सीखने की सलाह दी
भुवनेश्वर/दक्षिण भारत। केआईआईटी डीयू का 21वां वार्षिक दीक्षांत समारोह रविवार को संपन्न हुआ। इसमें 9,464 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। इनमें 7,235 स्नातक, 2,034 स्नातकोत्तर और 195 पीएचडी शामिल हैं।
विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार यह कार्यक्रम तीन दिनों तक आयोजित किया गया, ताकि बड़ी संख्या में आए विद्यार्थियों और उनके परिवारों को सुविधा हो।इस समारोह में श्रीलंका के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. मोहन मुनसिंघे, ट्यूनीशिया के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ओउइद बुचामाउई और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष डॉ. न्यायमूर्ति अब्दुलकावी अहमद यूसुफ ने शिरकत की।
मानद डॉक्टरेट की उपाधियां बुचामाउई के अलावा ग्वाटेमाला के रेक्टर और कांग्रेस सदस्य डॉ. फिदेल रेयेस ली, वॉकहार्ड्ट लि. के कार्यकारी निदेशक एवं वैश्विक मानवतावादी अधिवक्ता डॉ. हुज़ैफ़ा खोराकीवाला, जर्मनी के पुरातत्व पार्क के अध्यक्ष नॉर्बर्ट सॉयर, लालचंद समूह के संस्थापक अध्यक्ष सुंजॉय हंस, कंपीटीशन सक्सेस रिव्यू के एसके सचदेवा को प्रदान की गईं।
प्रो. मुनासिंघे ने बदलती दुनिया में स्थिरता और शांति की तात्कालिक चुनौतियों पर बात की। उन्होंने 'गरीबी, असमानता और संसाधनों की कमी के गठजोड़' पर प्रकाश डाला।
न्यायमूर्ति यूसुफ़ ने युवाओं से वैश्विक शांति-निर्माता और न्याय की आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने लिंग, जाति, क्षेत्र और धर्म के आगे 'विश्वास के पुल और आधार बनाने' का आह्वान किया। उन्होंने 'अंधेरे में अन्याय की आहट' के समय खड़े होने और पीड़ितों और शोषितों के प्रति करुणा रखने का आग्रह किया।
अपने भाषण में, बुचामाउई ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केआईआईटी का दौरा करने वाले 23 अन्य नोबेल पुरस्कार विजेताओं की श्रेणी में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
वक्ताओं ने केआईआईटी और केआईएसएस के संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत के दोनों संस्थानों को विश्वस्तरीय परिसरों के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण की सराहना की। डॉ. खोराकीवाला ने कहा कि ये शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्टता के स्तंभ हैं।
सचदेवा ने कहा, 'प्रो. सामंत एक दूरदर्शी नेता और मानवतावादी हैं, जिनका जीवन सेवा, लचीलेपन और करुणा का आदर्श है।' डॉ. ली ने कहा कि यह सम्मान भारत और ग्वाटेमाला के बीच शिक्षा, शांति और न्याय के क्षेत्र में मज़बूत संबंधों का प्रतीक है।
केआईआईटी-डीयू के चांसलर अशोक कुमार परिजा ने कहा, 'साल 2025 का स्नातक वर्ग न केवल अकादमिक उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि परिवर्तन का अग्रदूत बनने का साहस और संकल्प भी दर्शाता है।'
प्रो-चांसलर प्रो. (डॉ.) एसके आचार्य ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया और उन्हें निरंतर सीखने के मूल्य को आत्मसात करने की सलाह दी, क्योंकि शिक्षा सिर्फ डिग्री मिलने के साथ ही समाप्त नहीं हो जाती। केआईआईटी के कुलपति प्रो. सरनजीत सिंह, रजिस्ट्रार प्रो. जेआर मोहंती, विभागाध्यक्ष और स्कूल प्रमुखों के साथ हज़ारों कर्मचारी और विद्यार्थी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर डॉ. सामंत ने सभी स्नातकों को बधाई दी और कहा, 'हम उत्कृष्टता के लिए अपनी संस्थागत प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करते हैं, क्योंकि हम उन्नत अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से अकादमिक प्रभाव को गहरा करना जारी रखते हैं।'


