ऐसा रहा है रायबरेली लोकसभा सीट का इतिहास, जहां से कांग्रेस ने राहुल पर लगाया दांव

इस बार राहुल गांधी अपनी माता सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से किस्मत आजमाएंगे

ऐसा रहा है रायबरेली लोकसभा सीट का इतिहास, जहां से कांग्रेस ने राहुल पर लगाया दांव

Photo: rahulgandhi FB page

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। उत्तर प्रदेश की रायबरेली और अमेठी लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने शुक्रवार को उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। पहले, ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी रायबरेली से प्रियंका वाड्रा और अमेठी से एक बार फिर राहुल गांधी को मैदान में उतारेगी। हालांकि कांग्रेस ने दोनों ही संभावनाओं को खारिज करते हुए टिकट दिए हैं।

इस बार राहुल गांधी अपनी माता सोनिया गांधी की सीट रायबरेली से किस्मत आजमाएंगे। वे साल 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार गए थे। रायबरेली ऐसी सीट है, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है।

इस सीट से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी लोकसभा पहुंच चुकी हैं। यही नहीं, साल 1952 और 1957 में यहां से फ़िरोज़ गांधी जीत दर्ज कर चुके हैं। उनके बाद आरपी सिंह और बैजनाथ कुरील ने इस सीट का प्रति​निधित्व किया था।

साल 1967 में यहां से इंदिरा गांधी ने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता था। उन्होंने साल 1971 में भी यह सिलसिला जारी रखा। हालांकि साल 1977 में परिस्थितियां बदलीं और यह सीट जनता पार्टी के राज नारायण के नाम हुई।

साल 1980 में एक बार फिर इंदिरा गांधी ने परचम लहराया। उनके बाद कांग्रेस के टिकट से अरुण नेहरू, शीला कौल लोकसभा पहुंचे थे। साल 1996 और 1998 में भाजपा के अशोक सिंह मैदान फतह करने में कामयाब रहे। 

साल 1999 में कांग्रेस ने फिर वापसी की। इस बार सतीश शर्मा ने जीत दर्ज की। साल 2004 में सोनिया गांधी ने यहां से पर्चा भरा। यह सीट कांग्रेस की झोली में गई और साल 2019 तक सोनिया गांधी ने यहां से लगातार जीत दर्ज की। 

इस बार सोनिया गांधी राजस्थान से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुई हैं। उनकी जगह उनके बेटे राहुल गांधी मैदान में हैं। अब यह देखना बड़ा दिलचस्प होगा कि कांग्रेस एक बार फिर यह सीट अपने नाम करने में कामयाब रहेगी या भाजपा अपने प्रदर्शन से चौंकाएगी!

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