कांग्रेस
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नई दिल्ली/भाषा। आप के साथ गठबंधन करने के मुद्दे पर दो हिस्सों में बंटी दिल्ली कांग्रेस के सामने नयी चिंता पैदा हो गयी है जहां उसके वरिष्ठ मुस्लिम नेताओं ने नाराजगी के साथ ही आशंका जतायी कि लोकसभा चुनावों में किसी मुसलमान नेता को टिकट नहीं मिलेगा। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को शनिवार को लिखे पत्र में पांच पूर्व विधायकों ने चांदनी चौक या उत्तर पूर्व दिल्ली लोकसभा सीटों से किसी मुस्लिम नेता को उतारने की मांग की है।

इनमें तीन नेता पांच बार दिल्ली के विधायक रह चुके हैं। पार्टी की दिल्ली इकाई के मुस्लिम नेताओं की नाराजगी राजधानी की सातों सीटों पर उम्मीदवारों के नाम के ऐलान से कुछ ही दिन पहले सामने आई है। इस पत्र पर मतीन अहमद, शोएब इकबाल, हसन अहमद और आसिफ मोहम्मद खान के हस्ताक्षर हैं और उम्मीदवार के नाम के लिए दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हारून यूसुफ के नाम का भी जिक्र है।

हसन अहमद और आसिफ मोहम्मद खान दो बार दिल्ली विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। नेताओं ने पत्र में लिखा, मुस्लिम वोटों की संख्या, पांच मुस्लिम नेताओं के जीतने के ट्रैक रिकार्ड और उनके योगदान को देखते हुए इनमें से किसी एक को चांदनी चौक या उत्तर पूर्व दिल्ली संसदीय क्षेत्र से टिकट दिया जाना चाहिए।

राहुल गांधी को लिखे पत्र में कहा गया है कि पांचों नेता मुसलमानों और अन्य समुदायों में बहुत लोकप्रिय हैं तथा बहुत सक्रिय हैं। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा, लोगों में बहुत नाराजगी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली से किसी मुस्लिम को टिकट नहीं दिया जा रहा। चार नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध जताने के लिए दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित से मुलाकात की थी।

मतीन अहमद ने मुलाकात के बाद कहा, दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में टिकटों का ऐलान अभी नहीं किया गया है और उन्होंने हमारी मांग पर विचार करने का वादा किया। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली के सातों कांग्रेस उम्मीदवारों के नाम सोमवार को घोषित किये जा सकते हैं। दिल्ली में नामांकन १६ अप्रैल से भरे जाएंगे। दिल्ली की सातों सीटों पर १२ मई को मतदान होगा।

सूत्रों ने दावा किया कि चांदनी चौक सीट के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और उत्तर पूर्व दिल्ली सीट के लिए पूर्व सांसद जेपी अग्रवाल के नाम तय कर लिये गये हैं। यूसुफ ने कहा कि उन्हें पार्टी पर भरोसा है और दिल्ली में उम्मीदवारों के चयन पर वह पार्टी के फैसले को स्वीकार करेंगे। प्रदेश २०१४ में इन्हें बता चुका है कि जाति की स्वार्थभरी राजनीति नहीं, विकास चाहिए।

मोदी ने सपा-बसपा पर हमला जारी रखते हुए कहा, (पश्चिमी उत्तर प्रदेश में) कैसे बहन-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, कैसे लोगों को अपना घर, अपना कारोबार छोड़ना पड़ा, ये देश ने देखा है … जब पश्चिमी यूपी जल रहा था, मासूम लोग मारे जा रहे थे, तब उसके पीड़ितों की आवाज को अनसुना करने वाला कौन था?

उन्होंने कहा, अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए ऐसे लोगों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की दुख-तकलीफें, उन पर जो गुजरी, सब भुला दिया है … पश्चिमी यूपी में कितना बड़ा पाप हुआ, पूरा देश इसका गवाह रहा है।

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