india pak in icj
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हेग/दक्षिण भारत। भारत-पाक के बीच तल्ख रिश्तों की झलक अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में भी दिखाई दी। सोमवार को कुलभूषण जाधव मामले में भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि पेश हुए। वहां पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर खान ने भारत के दीपक मित्तल की ओर हाथ बढ़ाया तो मित्तल ने हाथ मिलाने के बजाय उन्हें नमस्कार कह दिया।

चार दिन तक चलने वाली इस सुनवाई पर भारत और पाकिस्तान दोनों की निगाहें हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय में बतौर संयुक्त सचिव कार्यरत दीपक मित्तल के साथ वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे भारत का पक्ष रखने गए। वहीं पाकिस्तान की ओर से ख्वार कुरैशी आईसीजे गए हैं। मामले में ​जिरह करते हुए हरीश साल्वे ने कहा कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव द्वारा 13 बार गुजारिश के बाद भी उन्हें काउंसलर एक्सेस मुहैया नहीं कराया, जो स्पष्ट रूप से वियना संधि का उल्लंघन है।

हरीश साल्वे ने कहा कि जाधव निर्दोष हैं और पाकिस्तान उन्हें फंसाने के लिए दुष्प्रचार कर रहा है। उन्होंने वियना संधि का जिक्र करते हुए कहा कि काउंसलर एक्सेस दिए बिना जाधव को जेल में रखना अनुचित है। लिहाजा उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी घोषित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पाक का आचरण इस बात का भरोसा नहीं दिलाता कि जाधव को वहां न्याय मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि पाक ने एक भारतीय को बलूचिस्तान में अशांति फैलाने वाले आतंकी और एजेंट के रूप में पेश किया है। उसने भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जाधव का इस्तेमाल किया है। वहीं दीपक मित्तल ने कहा कि आईसीजे से सवा सौ करोड़ भारतवासियों को उम्मीद है। पाकिस्तान ने एक निर्दोष भारतीय को नागरिक अधिकारों का हनन कर आईसीजे के ऑर्डर का ठीक से पालन नहीं किया है।

दूसरी ओर, पाकिस्तानी पक्ष ने दलील दी कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अंतर्गत जासूसी मामले में काउंसलर एक्सेस का प्रावधान नहीं किया गया है। इस पर हरीश साल्वे ने कहा कि वियना संधि का निर्माण करने वालों की कभी यह मंशा नहीं कि जासूसी मामले में अनुच्छेद 36 लागू नहीं होगा। साल्वे ने दलील दी कि द्विपक्षीय समझौता वियना संधि के उक्त अनुच्छेद को संशोधित नहीं कर सकता है। बता दें कि भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की फौजी अदालत ने जासूसी के आरोप में अप्रेल 2017 में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद यह मामला आईसीजे में है।

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