नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को नरमी दिखाने से इंकार करते हुए केन्द्र को सीआरपीएफ के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के मुद्दे पर गौहाटी उच्च न्यायालय के एक आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि नौकरशाह कानून से ऊपर नहीं हैं। न्यायालय ने सीआरपीएफ के महानिदेशक को उच्च न्यायालय के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने अर्द्धसैनिक बल के कुछ शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की है। न्यायालय ने कहा कि डीआईजी स्तर के एक अधिकारी उच्च न्यायालय में उपस्थित रहेंगे। उच्च न्यायालय ने उस मामले में शीर्ष सीआरपीएफ अधिकारी की निजी उपस्थिति का निर्देश दिया था जिसमें अदालत ने अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद जून २००७ में सेवाएं बर्खास्त होने के बाद एक कांस्टेबल की बहाली का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति एसके कौल की पीठ ने कहा, नौकरशाह कानून से ऊपर नहीं हैं। आप (केन्द्र) अंतिम क्षण में क्यों आए हैं? आप जाइए और पेश होइए। हम इस पर रोक नहीं लगाएंगे। एक अधिकारी को वहां जाना होगा। आप उस एक अधिकारी को चुनें। केन्द्र की ओर से पेश वरिष्ठअधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने पीठ से कहा कि व्यक्ति की भर्ती आरक्षित श्रेणी में हुई जिसके लिए उच्च न्यायालय की एकल पीठ के सामने असली रिकार्ड भी पेश किए गए। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने अंतरिम आदेश मंजूर करने से इन्कार करते हुए यह कहकर गलती की कि उसकी भर्ती समान्य श्रेणी पद पर हुई, अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार के रूप में नहीं।

LEAVE A REPLY