राहुल गांधी के पास न कोई विजन है, न ही कोई सकारात्मक एजेंडा: बांसुरी स्वराज

भाजपा सांसद ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया

राहुल गांधी के पास न कोई विजन है, न ही कोई सकारात्मक एजेंडा: बांसुरी स्वराज

Photo: @BJPLive X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने बुधवार को यहां पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक नया झूठा नैरेटिव इस देश में खड़ा करने का प्रयास किया है। 'स्मैश द पैट्रीआर्की'! मैं इसके लिए पूरी तरह सहमत हूं।

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उन्होंने कहा कि मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि क्या आप 'स्मैश द पैट्रीआर्की' का नारा पुणे के स्टेज तक ही सीमित रखते हैं, और आप अपनी कांग्रेस पार्टी में राजनीतिक पितृसत्ता को संरक्षण देते रहते हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के पास न कोई विजन है, न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। इसलिए अब उनकी रिसर्च टीम जो भी पर्ची पर लिखकर दे देती है, उसी से वे देश के मतदाताओं और युवाओं को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं। 

बांसुरी स्वराज ने कहा कि जब हमारी मंडी की सांसद कंगना रनौत को टिकट मिला, तब कांग्रेस पार्टी की एक महिला नेता सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से अभद्र टिप्पणी की गई थी। याद है आपको, रेट पूछा गया था... तब राहुल गांधी ने चुप्पी साध ली थी। मैंने ही इस मामले के खिलाफ शिकायत की थी।

उन्होंने कहा कि अप्रैल 2024 में रणदीप सुरजेवाला ने कैथल की एक रैली में भाजपा सांसद हेमा मालिनी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की थी, लेकिन राहुल गांधी जी ने मौन साध लिया था। अधीर रंजन चौधरी ने देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 'राष्ट्रपत्नी' कहकर अपमानित किया था, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने मौन साध लिया था।

बांसुरी स्वराज ने कहा कि 22 अगस्त को उन्होंने (राहुल गांधी) पुणे के मंच से यह बयान दिया, जबकि 10 दिन पहले खुद राहुल गांधी, संदीप दीक्षित के साथ एक बेहद ओछे मजाक में शामिल हुए थे। एक महिला प्रधानमंत्री के साथ, वह भी हमारे मित्र देश इटली की, जो वहां की वर्तमान प्रधानमंत्री हैं।

उन्होंने कहा कि मैं आपको चुनौती देती हूं: अगर आप सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहते हैं, तो पूरा 'वंदे मातरम्' गाइए। संसद ने एक कानून पास करके 'वंदे मातरम्' को 'जन गण मन' के बराबर का दर्जा दिया था, लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने ... सोच और क्रूरता के आगे झुकते हुए एक प्रस्ताव पास किया और उस गीत के स्वरूप को छोटा कर दिया, वह गीत जो मातृभूमि को देवी के रूप में देखता है। सिर्फ तुष्टीकरण की राजनीति के लिए आप गैर-कानूनी काम करने को भी तैयार हैं।

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