हाथ जोड़कर अपनी ओर आकर्षित करता है 'नमो घाट'
आधुनिकता, आध्यात्मिकता व पर्यटन की दृष्टि से लबरेज हैं बनारस के घाट
नमस्कार प्रतिमा वाला नमो घाट
.. देवेंद्र शर्मा ..
बनारस/दक्षिण भारत। नमो घाट बनारस की प्राचीन आध्यात्मिकता और आधुनिक वास्तुकला का एक अद्भुत मिश्रण है। नमो घाट सुबह की सैर और शाम के खूबसूरत नज़ारों के लिए बेहतरीन जगह है। यहॉं से गंगा नदी का बहुत ही शानदार दृश्य दिखाई देता है, साथ ही ओवर रेलब्रिज व रोडब्रिज इसकी खूबसूरती को चार चांद लगा देते हैं। यह घाट आदि केशव घाट के पास स्थित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2018 में नमो घाट परियोजना की आधारशिला रखी थी। यह घाट 21,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह आधुनिक सुविधाओं से युक्त घाट है, जिसमें पर्यटकों के लिए एक दर्शन दीर्घा (व्यूइंग) डेक, एक कैफेटेरिया और एक पार्किंग स्थल जैसी सुविधाएं बनाई गई हैं। इस घाट का मुख्य आकर्षण तीन विशाल मूर्तियां हैं जो हाथ जोड़कर ’नमस्ते’ का भाव दर्शाती हैं, जो अतिथि देवो भवः के विचार को भी प्रदर्शित करती हैं। यहॉं नमो घाट पर गंगा की ओर झुकते हुए नमस्ते की मुद्रा में कई विशाल प्रतिमाएँ स्थापित की गई हैं, जो आगंतुकों का स्वागत करती नजर आती हैं।
(पानी पर तैरता सीएनजी स्टेशन)
गंगा नदी में प्रदूषण को कम करता हुआ ‘पहला तैरता सीएनजी स्टेशन’
वैसे तो बनारस आध्यात्मिकता, धर्म, संस्कार व बाबा भोलेनाथ का शहर है, परन्तु इन दिनों हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र होने के कारण यह नवाचारों का केन्द्र बन गया है।बनारस एक ऐसा शहर बन गया है जहां आधुनिकता अब आध्यात्मिकता के साथ कंधे से कंधा मिलकर चल रही है। उसी नवाचार में सबसे नया नवाचार है मां गंगा की निच्छल लहरों पर तैरता प्राकृतिक गैस ‘सीएनजी’ स्टेशन। वाराणसी में दुनिया का पहला फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन हैं, जिसे गेल इंडिया लिमिटेड ने गंगा नदी में प्रदूषण कम करने के लिए बनाया है। नमो घाट और रविदास घाट पर मौजूद इस तरह के तैरते सीएनजी स्टेशन लगभग 17.5 करोड़ रुपए की लागत से बनाए गए हैं। इन तैरते सीएनजी स्टेशनों पर 900+ से ज़्यादा, सीएनजी प्रणाली में बदली हुई नावों को सीएनजी ईंधन दिया जाता हैं, जिससे हवा और आवाज़ के प्रदूषण में काफ़ी कमी आई है। जानकारी के अनुसार पहला सीएनजी स्टेशन नमो घाट (पहले खिरकिया घाट कहलाता था) पर है और दूसरा रविदास घाट पर है। हर स्टेशन रोज़ाना 300-400 नावों को भर सकता है, जिनकी क्षमता 4,000-5,000 किलोग्राम प्रति दिन है। इस प्रोजेक्ट में नावों के लिए मुफ़्त सीएनजी किट इंस्टॉलेशन की सुविधा भी है। गेल इंडिया लिमिटेड ने एक्वाफ्रंट इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर इन स्टेशनों को बनाया है।

(अस्सी घाट पर गंगा आरती का मनोरम दृश्य)
बनारस यात्रा को पूर्णता प्रदान करती है अस्सी घाट की ‘गंगा आरती’
बनारस तो घाटों की ही नगरी है। नमो घाट से घाटों की शुरुआत होती है और लगभग अस्सी घाट तक जाते जाते यह घाट श्रृंखला समाप्त हो जाती है।वाराणसी में अस्सी घाट, गंगा और असि नदी का संगम स्थल है, जो अपनी सुप्रसिद्ध सुबहा-ए-बनारस (सुबह की आरती) के लिए जाना जाता है। यह आरती सुबह लगभग 5 बजे (सूर्योदय) के आसपास मंत्रोच्चार और शंखनाद के साथ होती है, जो आध्यात्मिक शांति प्रदान करती है। यहॉं नाव से आरती देखना एक अनोखा अनुभव है। पत्र सूचना कार्यालय(पीआईबी) बेंगलूरु की सहायक निदेशक करिश्मा पंत के नेतृत्व में कर्नाटक से लगभग 10 पत्रकारों के दल ने अस्सी घाट का दौरा किया तथा जानकारियां प्राप्त की। काशी के पांच प्रमुख तीर्थ स्थलों में से अस्सी घाट में, स्नान अनिवार्य माना जाता है। अस्सी घाट पर्यटकों के लिए एक शांत और सांस्कृतिक केंद्र है, जो दशाश्वमेध घाट की तुलना में कम भीड़भाड़ वाला है। शाम ढलते ही अस्सी घाट का दृश्य अत्यंत मनोहारी और आध्यात्मिक हो जाता है। शाम को लगभग 6.30 बजे से गंगा आरती के आरंभ होते ही घाट के वातावरण में श्रद्धा, शांति और पवित्रता की विशेष अनुभूति होने लगती है। श्रद्धालुओं द्वारा नदी के किनारे दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, जबकि विशेष पुजारियों द्वारा गंगा तट पर एक तय प्लेटफार्म पर पारंपरिक, धार्मिक रूप में विशेष शैली में गंगा माता की आरती की जाती है। मंत्रोच्चार व शुद्धिकरण के साथ शुरु होने वाली गंगा आरती जैसे जैसे आगे बढ़ती है, श्रद्धालुओं में अद्भुत उर्जा भरने वाली बनती जाती है। आरती के दौरान घाट पर उपस्थित श्रद्धालुओं की भीड़ भक्ति में झूम उठती है और पूरा वातावरण आध्यात्मिकता से सराबोर हो जाता है। आरती के दौरान सुनाई देने वाली घंटियों की ध्वनि, मंत्रोच्चार और भजन पूरे वातावरण को आध्यात्मिक भाव में डुबो देते हैं। गंगा के किनारे जलते हुए दीपकों की रोशनी व पंडितों द्वारा की जाने वाली गंगा आरती मानव मन में एक अनुपम स्फूर्ति का संचार करती है। बनारस में काशी विश्वनाथ के दर्शन से शुरु होने वाली धार्मिक यात्रा शाम को गंगा आरती से ही पूर्ण होती है।


