आईआरजीसी के ये घातक ड्रोन अमेरिकी बेस पर बरपा रहे कहर
आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स और नेवी के बीच काम का बंटवारा हो गया
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तेहरान/दक्षिण भारत। अमेरिकी और इजराइली ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 जारी है। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) नौसेना के आत्मघाती ड्रोन युद्ध में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मंगलवार को युद्ध के चौथे दिन एक महत्त्वपूर्ण घटनाक्रम यह हुआ कि आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स और आईआरजीसी नेवी के बीच काम का बंटवारा हो गया।ऑपरेशन के दौरान जो देखा गया है, उसके आधार पर आईआरजीसी नेवी को फारस की खाड़ी में अमेरिकी बेस को टारगेट करने का काम सौंपा गया है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, पिछले चार दिनों में, अमेरिकी एयर डिफेंस ऑपरेशन्स को इस इलाके में अमेरिकी बेस की पूरी सुरक्षा करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।
इस बीच, ईरान ने दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने के लिए आत्मघाती ड्रोन को एक असरदार और कम लागत वाले तरीके के तौर पर इस्तेमाल करने को अपने एजेंडे में शामिल किया है।
आईआरजीसी नेवी, जिसके पास इनकी बड़ी संख्या है, ने इन ड्रोन का इस्तेमाल करके अमेरिकी बेस के खिलाफ ऑपरेशन करने का काम शुरू किया है।
आईआरजीसी के ऑपरेशन की 14वीं और 15वीं लहरें आईआरजीसी नेवी ने चलाईं, जिसमें समुद्री मोर्चे और दक्षिणी फ़ारस की खाड़ी में अमेरिकी बेस पर ध्यान दिया गया।


