एक और उज्ज्वल अध्याय

जब सिर पर संकट के बादल मंडराते हैं तो सबसे पहले मां की याद आती है

एक और उज्ज्वल अध्याय

भारत माता पूरे अखंड भारत के वासियों की माता है

भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं के चंगुल से लगभग दो दर्जन पाकिस्तानी नागरिकों को मुक्त करवाकर मानवता की रक्षा के इतिहास में अपना एक और उज्ज्वल अध्याय जोड़ दिया। भारतीय नौसेना ने समय-समय पर ऐसे कई अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिसमें वह जरूरतमंदों के लिए देवदूत बनकर आई और उनकी जान बचाई। इस बार भारतीय नौसैनिकों ने पाकिस्तानियों की जान बचाकर अपना फर्ज निभाया है। निस्संदेह यह अभियान बहुत खतरनाक था। इसमें नौसैनिकों को बड़ा नुकसान हो सकता था, चूंकि सामने जो डाकू थे, उनके पास भी घातक हथियार थे। समुद्री डाकू अपने कुकृत्यों के लिए कुख्यात हैं। वे इन्सान की जान लेने से जरा भी नहीं हिचकते। उनकी पकड़ में आने के बाद पाकिस्तानी नागरिकों को यह लग रहा था कि अब ज़िंदगी का खेल खत्म होने वाला है, लेकिन भारतीय नौसेना ने उनके प्राण बचा लिए। बल्कि यह कहना ज्यादा उचित होगा कि नौसेना ने दो दर्जन परिवार बचा लिए। अगर समुद्री डाकू इन पाकिस्तानियों की ज़िंदगी को नुकसान पहुंचा देते तो इन लोगों के परिवारों के लिए भी यह भारी दु:खदायक घटना होती। उक्त पाकिस्तानी नागरिकों ने भारतीय नौसेना का आभार जताया, उसके समर्थन में नारे भी लगाए। जब यह खबर उनके देश पहुंची तो पाकिस्तानी मीडिया इस पर टिप्पणी करने और आभार मानने से कन्नी काटता नजर आया। अगर कोई व्यक्ति/संगठन/सरकार किसी की जान बचाए तो उसका आभार मानना चाहिए, लेकिन 'नाशुक्रा' होना पाकिस्तानियों की पुरानी आदत है।

जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ तो भारत-पाक के कई विद्यार्थी यूक्रेनी शहरों में फंस गए थे। उस दौरान भारत सरकार ने अपने प्रयासों से दोनों देशों को कुछ समय के लिए गोलीबारी बंद करने के लिए राजी कर लिया था। भारतीय विद्यार्थी युद्ध के मैदान में अपने हाथों में तिरंगा थामे और भारत माता के जयकारे लगाते हुए गंतव्य की ओर बढ़ते जा रहे थे। तब कुछ पाकिस्तानियों ने भी तिरंगे की छाया में रहकर अपने प्राण बचा लिए थे। उन्होंने भारत माता के जयकारे लगाए थे। सत्य है, जब सिर पर संकट के बादल मंडराते हैं तो सबसे पहले मां की याद आती है! भारत माता पूरे अखंड भारत के वासियों की माता है। पिछली सदी में कुछ लोगों ने अपनी पूरी ताकत यह साबित करने में लगा दी थी कि वे भारत मां की संतानें नहीं हैं। उन्होंने देश का विभाजन भी करवा दिया, लेकिन कर्मफल उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। अब वे अपनी पहचान को लेकर भ्रमित हैं। वे भारतीय संस्कृति से अपना कोई संबंध न होने की बात तो दोहराते हैं, लेकिन कालचक्र उन्हें बार-बार ऐसे मोड़ पर ले आता है, जब भारत ही उनके प्राण बचाने के लिए हाथ बढ़ाता है। पाकिस्तान में लोगों को जो कोरोनारोधी वैक्सीन लगाई गई, वह भी भारत से गई थी। हालांकि पाकिस्तानियों ने उसका श्रेय डब्ल्यूएचओ को दिया था। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई पाकिस्तानियों को भारत की तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मानवता के आधार पर जल्द वीजा दिलाने और भारतीय अस्पतालों में इलाज कराने में बहुत मदद की थी। जब अगस्त 2019 में सुषमा स्वराज का स्वर्गवास हुआ तो पाकिस्तान में बहुत लोग उनके लिए अभद्र व अशालीन शब्दों का प्रयोग कर रहे थे। पाकिस्तान का एक कथित रक्षा विश्लेषक तो आज भी टीवी और बड़े यूट्यूब चैनलों पर आकर अनर्गल बयानबाजी करता रहता है। यह उस नफरत का नतीजा है, जो इस पड़ोसी देश के लोगों के दिलो-दिमाग में वर्षों से भरी जा रही है। नफरत में डूबे लोग यह जानने की कोशिश नहीं करेंगे कि उनके देशवासियों को जीवनदान देने के लिए भारत ने कई बार हाथ बढ़ाया है। पाकिस्तानी भले ही कृतघ्नता दिखाएं, लेकिन मानवता की रक्षा और सेवा करने से भारत कभी पीछे नहीं हटेगा।

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