गणतंत्र दिवस समारोह में दुनिया देखेगी कर्नाटक की 'नारी शक्ति'

कर्तव्य पथ पर कर्नाटक के गौरव को प्रदर्शित करेगी झांकी

गणतंत्र दिवस समारोह में दुनिया देखेगी कर्नाटक की 'नारी शक्ति'

3 महिलाओं के उत्कृष्ट कार्यों को दर्शाएगी

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। कर्नाटक की ओर से गणतंत्र दिवस समारोह के लिए महिला सशक्तीकरण को दर्शाती सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की 'नारी शक्ति' झांकी पूरी तरह तैयार है। यह झांकी 26 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी के कर्तव्य पथ पर कर्नाटक के गौरव को प्रदर्शित करेगी। इसके साथ, कर्नाटक लगातार 14 वर्षों तक झांकी अनुभाग में भाग लेने वाला देश का एकमात्र राज्य होने का गौरव प्राप्त करेगा।

इस साल की गणतंत्र दिवस की झांकी कर्नाटक के लिए सबसे यादगार है। राज्य ने बेहद कम समय में उत्कृष्ट झांकी तैयार की है। कर्नाटक की महानता और कन्नड़ पहचान की प्रतीक यह झांकी महज 10 दिन में बनकर तैयार हुई है।

अपनी झांकी की विशिष्टता से ध्यान खींचने वाला कर्नाटक साल दर साल नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।

विभाग के आयुक्त डॉ. पीएस हर्षा ने यहां आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा, 'सूचना विभाग हर बार राज्य की ओर से चित्र के साथ दिल्ली गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेता है। सूचना विभाग झांकी के विषय चयन, डिजाइन, केंद्र में इसकी स्वीकृति, निर्माण, भागीदारी आदि के सभी चरणों में सक्रिय रूप से शामिल है। साथ ही विभाग पिछले 14 वर्षों से लगातार गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेता आ रहा है। यह कुछ ऐसा है, जिस पर सभी कन्नडिगाओं को गर्व हो सकता है।'

विभाग ने गणतंत्र दिवस झांकी के लिए पांच विषयों - कर्नाटक की महिलाओं की बहादुरी; 'रेशम': कर्नाटक का गौरव; कर्नाटक में फूलों की खेती; कर्नाटक: मोटे अनाज का अगुआ और 'नारी शक्ति' का चयन किया था।

आयुक्त ने कहा कि इन पांचों में महिला सशक्तीकरण को दर्शाने वाली थीम 'नारी शक्ति' को 'थीम चयन विशेषज्ञ समिति' ने अंतिम रूप दिया था। इस बार की झांकी तीन सफल महिलाओं की उपलब्धियों को प्रदर्शित कर रही है, जिन्होंने कर्नाटक का गौरव बढ़ाया है।

राज्य ने गणतंत्र दिवस समारोह में 'आजादी का अमृत महोत्सव' के हिस्से के रूप में सुलगीती नरसम्मा, 'वृक्ष माता' तुलसी गौड़ा हालक्की और सालूमरदा तिमक्का की उपलब्धियों को 'नारी शक्ति' के रूप में प्रस्तुत किया है।

समाज में उनके निःस्वार्थ योगदान के लिए उन्हें केंद्र सरकार द्वारा 'पद्म श्री' पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। यद्यपि उनका जन्म और पालन-पोषण कर्नाटक के अत्यंत पिछड़े गांवों के अत्यंत साधारण परिवारों में हुआ था। फिर भी उनकी जन्म-जाति-प्रतिष्ठा उपलब्धियों के आड़े नहीं आईं। उन्होंने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया। कर्नाटक और देश को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है। आयुक्त ने कहा, 'इसे दर्शाने के लिए झांकियां बनाई गई हैं।'

झांकी में क्या है?

दाई मां नरसम्मा पौधों, पेड़ों, पहाड़ियों और पक्षियों से सजी एक झांकी के सामने पालना झुलाती हुई दिखाई देंगी। वे चिकित्सकों के अभाव में पारंपरिक प्रसव कराने में माहिर हैं। उन्होंने सात दशकों में ऐसे दो हजार से अधिक प्रसव कराए हैं।

हरी-भरी झांकी के केंद्र में तुलसी गौड़ा हालक्की को पौधों को सींचते दिखाया गया है। 'वृक्ष माते' के नाम से विख्यात तुलसी पौधों की दुर्लभ प्रजातियों की पहचान करने और उनकी खेती करने में माहिर हैं। उन्हें 30,000 से अधिक पौधे लगाने का श्रेय प्राप्त है। उन्हें झांकी में पौधों के बीच बैठकर उनकी देखभाल करते हुए दिखाया गया है। अंतिम भाग में सालूमरदा तिमक्का को दिखाया गया है, जिन्होंने राज्य राजमार्ग के किनारे 8,000 पौधे लगाए और उन्हें सींचा। इसके अलावा, राज्य राजमार्ग पर 4.5 किमी के दायरे में बरगद के 75 पेड़ लगाए हैं। उन्हें पौधों को पानी देते दिखाया गया है। इसे झांकी के अंतिम भाग में विशाल बरगद के पेड़ के माध्यम से दर्शाया गया है।

कड़ी प्रतिस्पर्धा

झांकी के साथ गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेना हर राज्य के लिए गर्व और प्रतिष्ठा की बात है। पहले सभी राज्यों को परेड में शामिल होने की इजाजत थी। सुरक्षा संबंधी कारणों और गणतंत्र दिवस समारोह की अवधि में कमी के कारण रक्षा मंत्रालय ने झांकी का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संख्या घटाकर 14 कर दी।

पुरस्कारों की झड़ी

विभाग को साल 2022 में प्रदर्शित झांकी 'पारंपरिक कढ़ाई पालना' के लिए दूसरा पुरस्कार मिला था। साल 2015 में, राज्य ने चन्नपट्टा खिलौनों का प्रदर्शन किया, जिसे गणतंत्र दिवस परेड में तीसरा पुरस्कार मिला था। साल 2012 में दक्षिण कन्नड़ की भूतराधना झांकी ने तीसरा पुरस्कार जीता था। साल 2011 में बीदर की पारंपरिक कला पर झांकी ने दूसरा पुरस्कार जीता था।

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