पाक फौज को इमरान की दो टूक- सिर्फ एक शर्त पर हो सकती है बातचीत, अगर ...

इमरान के इस संदेश को फौज और अदालतों पर हमला माना जा रहा है

पाक फौज को इमरान की दो टूक- सिर्फ एक शर्त पर हो सकती है बातचीत, अगर ...

Photo: PTIOfficialISB FB page

इस्लामाबाद/दक्षिण भारत। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री व पीटीआई के संस्थापक इमरान खान ने किसी भी संभावित बातचीत को अपनी पार्टी के 'चोरी हुए जनादेश' की वापसी और 'निर्दोष कैद कार्यकर्ताओं' की रिहाई से जोड़ा है।

अडियाला जेल से अपने संदेश में खान ने उनके और उनकी पत्नी के मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों से अनावश्यक रूप से देरी करने के बजाय अपने फैसलों में तेजी लाने का आग्रह किया।

पीटीआई के मीडिया विभाग ने कहा, खान ने दोहराया कि वे बातचीत के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन यह तभी हो सकता है जब उनका चुराया हुआ जनादेश वापस कर दिया जाए और निर्दोष कैद कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।

इसमें कहा गया है कि खान ने जोर देकर कहा कि बातचीत केवल विरोधियों के साथ की गई थी और इसलिए यह उन लोगों के साथ की जानी चाहिए, जो वर्तमान में पीटीआई के सबसे बड़े विरोधी हैं। जाहिर तौर पर उनका संकेत सैन्य प्रतिष्ठान की ओर था।

मुख्य न्यायाधीश काजी फ़ैज़ ईसा की हालिया टिप्पणी कि उन पर कोई दबाव नहीं था, पर प्रतिक्रिया देते हुए खान ने कहा, दबाव केवल उन लोगों पर पड़ता है, जो गलत काम करने से इन्कार करते हैं, जबकि आप पीटीआई के खिलाफ बी-टीम बन गए हैं।

खान ने ईसा को याद दिलाया कि आपने 9 मई की घटनाओं की आड़ में हमारे बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करने के अलावा पीटीआई के चुनाव चिह्न 'बल्ले' को छीन लिया और पीटीआई को समान अवसर नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि 9 मई के दंगों के संबंध में पीटीआई की याचिका 25 मई, 2023 से लंबित थी और अभी तक सुनवाई के लिए तय नहीं की गई।

खान ने कहा कि 8 फरवरी के आम चुनावों में कथित वोट धांधली के खिलाफ दायर पीटीआई की याचिकाएं भी सुनवाई के लिए तय नहीं की गईं और पीटीआई महिलाओं की आरक्षित सीटों के मुद्दे में भी देरी का सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसलों ने एक बार फिर आवश्यकता के सिद्धांत को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने कहा कि फैसले दबाव और धमकी के तहत लिए जा रहे हैं, जो देश की न्यायिक प्रणाली को नष्ट कर रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के छह न्यायाधीशों के पत्र ने साबित किया कि देश में जंगल का कानून कायम है।

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