पीएसएलवी के प्रक्षेपण में होगी देरी, जनवरी-2018 में प्रक्षेपण संभव

पीएसएलवी के प्रक्षेपण में होगी देरी, जनवरी-2018 में प्रक्षेपण संभव

बेंगलूरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश के अगले पीएसएलवी का प्रक्षेपण अगले वर्ष जनवरी के पहले सप्ताह करने का निर्णय लिया था। संगठन ने पूर्व में इसका प्रक्षेपण मौजूदा वर्ष २०१७ की दूसरी छमाही के किसी समय करने का इरादा जताया था। मंगलवार को यहां पत्रकारों से इस विषय में हुई बातचीत में इसरो के अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा कि ३० उपग्रहों को अंतरिक्ष भेजने वाले इस प्रक्षेपण यान का दिसंबर २०१७ के अंतिम सप्ताह या जनवरी २०१८ के पहले सप्ताह में प्रक्षेपित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पीएसएलवी सी३० मिशन की असफलता इसरो के लिए एक ब़डा झटका थी। इससे पीएसएलवी प्रक्षेपण यानों के संशोधनों के काम पर काफी असर प़डा और यह परियोजना कुछ समय के लिए पीछे हो गई। गौरतलब है कि इसरो का पीएसएलवी सी३९ मिशन इस वर्ष ३१ अगस्त को असफल घोषित किया गया था। इस प्रक्षेपण यान की हीट शील्ड वैज्ञानिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप सही ढंग से नहीं खुल सकी थी। उस लांचर से आईआरएनएसएस १एच को प्रमुख रूप से भेजा जा रहा था, जिसे निजी कंपनियों के सहयोग से इसरो ने विकसित किया था। डॉ. किरण कुमार ने संकेत दिया कि आने वाले वर्ष में इसरो हर महीने एक अंतरिक्ष मिशन भेजने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। ृख्यष्ठ प्प्तश्च घ्ैंत्त्श्नद्भय्द्म-ु ·र्ैंर्‍ द्भह्ज्द्मय्चांद पर भेजे जाने वाले दूसरे मिशन चंद्रयान-२ के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. किरण कुमार ने कहा कि इसके लिए इसरो पूरी तेजी से काम कर रहा है। इसे अगले वर्ष के मध्य में किसी समय प्रक्षेपित किया जाएगा। इसरो ने इस मिशन की लांचिंग के लिए भी पीएसएलवी प्रक्षेपण यान का ही प्रयोग करने का मन बनाया है। उन्होंने एक दिलचस्प जानकारी यह भी दी कि अंतरिक्ष शोध से जु़डी एक निजी कंपनी का चंद्र मिशन के प्रक्षेपण के लिए भी पीएसएलवी का प्रयोग किया जाएगा। ंफ्द्यह् यष्ठख्य् ्यद्मज्र्‍ ·ैंर्ैंझ्यद्मद्भह्र ·र्ैंर्‍ फ्ब्द्नय्यख्त्रय्हाल में व्यापार संगठन फिक्की और इसरो द्वारा संयुक्त रूप से नई दिल्ली में अंतरिक्ष शोध मिशनों के लिए निजी कंपनियों के साथ हुए आदान-प्रदान बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. किरण कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष मिशनों की ब़ढती संख्या को ध्यान में रखते हुए इसरो ने निजी कंपनी से सहयोगिता करने की योजना बनाई है। इसरो चाहता है कि घरेलू और वैश्विक बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक निजी कंपनियों को अपने साथ जो़डा जाए्। इस प्रयास में कुछ अन्य औद्योगिक निकायों और संगठनों के साथ भी इसरो की बातचीत चल रही है। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित अंतरिक्ष गतिविधि विधेयक के प्रावधानों के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में डॉ. एएस किरण कुमार ने बताया कि इस विधेयक को जनता की प्रतिक्रिया जानने के लिए जारी किया गया है। फिलहाल इसे कानूनी शक्ल देने के बारे में समय सीमा का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। इसकी प्रक्रिया हाल में शुरू ही हुई है और इस मामले में कई मील के पत्थर पार करना बाकी है। उन्होंने कहा कि इसरो ने केंद्र सरकार से अपील की है कि इसके मिशनों की संख्या और इनकी व्यापकता के मद्देनजर इसे दिए जाने वाले फंड में आगामी दो वित्त वर्षों में ब़ढोत्तरी की जाए्। बहरहाल, उन्होंने मांगी गई रकम बताने से इन्कार कर दिया। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि इसरो अपने मौजूदा बजट में कितने प्रतिशत की ब़ढोत्तरी चाहता है। ्यप्ए ख्रष्ठक्व द्यब्य् ृैंत्र्यद्यूय् द्बष्ठ्र द्नय्द्यत्रर्‍द्भ द्मष्ठत्रल्ह्वप् ·र्ैंर्‍ द्यय्ब्इससे पूर्व डॉ. किरण कुमार ने विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल म्यूजियम में अंतरिक्ष तकनीक दीर्घा का उद्घााटन किया। इस अवसर पर उन्होंन विद्यार्थियों से अपील की कि वह अपने पेशे के रूप में अंतरिक्ष तकनीक को अपनाएं्। भारत ने इस तकनीकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। अंतरिक्ष शोध भी अब सिर्फ अंतरिक्ष से जु़डे नहीं रहे, बल्कि इन शोधकार्यों में देश के विकास की चिंता देखने को मिल रही है। यही वजह है कि पूरा विश्व अंतरिक्ष में भारतीय नेतृत्व की राह देख रहा है। इसका सबूत यह है कि इसरो द्वारा छो़डे गए १०४ उपग्रहों की लांचिंग के वीडियोज लांचिंग के एक दिन बाद दुनिया के १०० से अधिक देशों के डे़ढ लाख से अधिक लोग देख रहे हैं्। इसरो के पूर्व अध्यक्ष और राष्ट्रीय शिक्षा नीति समिति के अध्यक्ष डॉ. के कस्तूरीरंगन ने अंतरिक्ष तकनीक दीर्घा के उद्घटन समारोह में इस बात पर जोर दिया कि आनेवाली पीि़ढयां अंतरिक्ष को भविष्य की नई संभावनाओं के रूप में देखें क्योंकि इस क्षेत्र में शोध के लिए बेहद तेजी से तकनीकी विकास हो रहा है। इनकी मदद से आने वाले समय में अंतरिक्ष के बेहद गहरे राज भी खोले जा सकेंगे। वहीं, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद के महानिदेशक एएस मानेकर ने उम्मीद जताई कि जल्दी ही वीआईटी जैसी अंतरिक्ष दीर्घा नई दिल्ली में भी स्थापित की जाएगी।

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