तेल और गैस का निर्यात या तो सबके लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं होगा: आईआरजीसी
आईआरजीसी ने दी अमेरिका को चेतावनी
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तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसने बुधवार को बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस पर बड़े सैन्य उपकरण डिपो और ईंधन भंडारण टैंक नष्ट कर दिए।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि 'ऑपरेशन नसर 2' के पांचवें चरण के तहत किए गए हमलों में एनएसए मैनेजमेंट सेंटर, कमांड और कंट्रोल हब, मिलिट्री स्पेयर पार्ट्स और उपकरणों के बड़े गोदाम, और बहरीन में फिफ्थ फ्लीट के फ्यूल स्टोरेज टैंक को निशाना बनाया गया।एक कड़े बयान में, आईआरजीसी ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने के बहाने हिंद महासागर में 'समुद्री लुटेरों' को तैनात करके शिपिंग मार्गों को रोक रहा है और दुनिया को इस क्षेत्र के तेल और गैस की आपूर्ति से वंचित कर रहा है।
उसने कहा कि दुश्मन को यह पता होना चाहिए कि अब उसके समुद्री लुटेरों ने हिंद महासागर से दुनिया के लिए तेल और गैस के निर्यात का रास्ता बंद कर दिया है, जिससे अमेरिका के आर्थिक प्रतिद्वंद्वियों के हितों को खतरा पैदा हो गया है। उन्हें तेल और गैस निर्यात के उन अन्य रास्तों के भी बंद होने की उम्मीद करनी चाहिए, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों को पूरा करते हैं।
बयान में कहा गया है कि इस इलाके से तेल और गैस का निर्यात या तो सबके लिए होगा या फिर किसी के लिए नहीं होगा।
एक कमर्शियल सैटेलाइट कंपनी ने बुधवार को बताया कि ईरान के मिसाइल हमलों के बाद कतर के अल-उदीद एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी फाइटर जेट रिपेयर सेंटर को नुकसान पहुंचा है, जिसकी पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से होती है।
ईरानी मीडिया के अनुसार, सैटेलाइट कंपनी 'सोअर एटलस' ने कहा कि तस्वीरों में मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे बड़े मिलिट्री बेस, अल-उदीद में अमेरिकी फाइटर जेट के रखरखाव केंद्र में हुई तबाही दिखाई दे रही है। कंपनी ने इस नुकसान को ईरान के सफल मिसाइल ऑपरेशन का नतीजा बताया।
मंगलवार को, इसी फर्म ने बहरीन में अमेरिकी हथियारों के भंडारण केंद्र को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी थी।
हाल के दिनों में आईआरजीसी ने पूरे इलाके में कई अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं। इनमें इस हफ़्ते की शुरुआत में अल-उदीद पर किए गए हमले भी शामिल हैं, जिनके बारे में कहना है कि फ़ाइटर जेट के रखरखाव केंद्रों और बेस कमांड पोस्ट को निशाना बनाया। ईरानी सेना ने जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर भी ड्रोन हमले किए हैं।


