ईरान ने कुवैत में अमेरिकी रडार और सैन्य ठिकाने पर हमला किया
ऑपरेशन नस्र 2 के तहत की गई कार्रवाई
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तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कुवैत के अली अल-सलेम एयरबेस पर सी-रैम अर्ली-वॉर्निंग रडार और अमेरिकी सैनिकों के जमावड़े पर हमला किया।
आईआरजीसी के जनसंपर्क कार्यालय ने एक बयान में कहा कि नौसेना और एयरोस्पेस सेनाओं ने ऑपरेशन नस्र 2 के तहत मिसाइल और ड्रोन से संयुक्त हमला किया।इसमें लक्ष्यों को सी-रैम अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम और उस जगह के तौर पर बताया गया, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात थे।
इस बयान में कुवैत के लोगों से फिर अपील की गई कि वे देखें कि अमेरिका उनकी ज़मीन का इस्तेमाल करके 'मुस्लिम' देश ईरान के ख़िलाफ़ अपराध कर रहा है।
साथ ही, उनसे कहा गया कि वे हमलावरों को अपने देश से बाहर निकालें और अपने इस्लामी फ़र्ज़ व ऐतिहासिक सम्मान को बनाए रखें।
यह ताज़ा घटनाक्रम ईरान के दक्षिणी तट और शहरों पर अमेरिका के हमलों वाली रात के बाद हुआ है। ईरानी सेनाएं कई दिनों से पूरे इलाके में अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रही हैं, जबकि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने बार-बार ईरानी इलाके पर हमले किए हैं।
सरकार के अनुसार, दक्षिणी ईरान में हमलों के सिलसिले में 30 से ज़्यादा आम नागरिक मारे गए हैं और अहवाज़ में बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास गोले गिरने के बाद वहां से लोगों को निकालना पड़ा।
खामेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़े 4 करोड़ से ज़्यादा लोग
आईआरजीसी के तेहरान कोर के कमांडर के अनुसार, पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार में 4 करोड़ से ज़्यादा लोग उमड़े थे।
ब्रिगेडियर जनरल हसन हसनज़ादेह ने कहा कि तेहरान, क़ोम, मशहद, नजफ़ और कर्बला में आयोजित अंतिम संस्कार समारोहों में कुल मिलाकर 4 करोड़ से ज़्यादा लोग शामिल हुए।
उन्होंने अंतिम संस्कार को एक ऐतिहासिक वैश्विक घटना बताया और कहा कि इन समारोहों में पांचों शहरों से लाखों शोक मनाने वाले लोग शामिल हुए।
उन्होंने यह भी कहा कि इराक, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और भारत समेत कई देशों से भी लोग इन कार्यक्रमों में शामिल होने आए थे। उन्होंने इस आयोजन को इस्लामी एकता और प्रतिरोध धारा की अखंडता का प्रतीक बताया।
तेहरान, क़ोम और इराक में कई दिनों तक चले बड़े विदाई समारोहों के बाद, 9 जुलाई को मशहद में इमाम रज़ा के पवित्र मज़ार पर खामेनेई के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।


