कोलकाता: ईडी ने एक पुलिस अधिकारी और कारोबारी के आवासों पर छापे मारे
ईडी की बड़ी कार्रवाई
Photo: @dir_ed X account
कोलकाता/दक्षिण भारत। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने रविवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले के सिलसिले में कोलकाता के अलग-अलग हिस्सों में कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी और एक कारोबारी के आवासों पर एकसाथ छापेमारी की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि ईडी के अधिकारियों ने केंद्रीय बलों के साथ मिलकर, इस मामले के सिलसिले में कोलकाता पुलिस के उप पुलिस आयुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास के बालीगंज स्थित आवास पर छापा मारा।अधिकारी ने बताया, 'यह छापा प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत दर्ज एक मामले के सिलसिले में मारा जा रहा है। हमारे पास एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के व्यक्ति के साथ पुलिस अधिकारी के कथित संबंधों को लेकर कुछ सवाल हैं। फ़िलहाल, पुलिस अधिकारी घर पर नहीं हैं और हम उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।'
ईडी के अधिकारियों ने बेहाला इलाके में कारोबारी जॉय कामदार के आवास पर भी छापा मारा। उन्होंने इससे पहले भी उसके दफ़्तर और आवास पर छापा मारा था।
बिस्वास के दो ठिकानों, जिनमें बालीगंज इलाके में स्थित उनका आवास भी शामिल है, और 'सन एंटरप्राइज' नामक कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर जय कामदार के एक ठिकाने पर 'मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम' के प्रावधानों के तहत छापा मारा गया है।
यह कार्रवाई बिस्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू नामक एक कथित स्थानीय अपराधी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले से जुड़ी है, जिस पर हत्या के प्रयास और जबरन वसूली के आरोपों में कई मामले दर्ज हैं।
ऐसा कहा जाता है कि पप्पू का दक्षिण कोलकाता के प्रमुख इलाकों - कसबा और बालीगंज - में काफी दबदबा है, और खबरों के मुताबिक, उस पर अलग-अलग आरोपों को लेकर कई एफआईआर दर्ज हैं। फरवरी में हुई गोलपार्क गैंगवार में भी वह मुख्य आरोपी है, लेकिन वह अभी भी कोलकाता पुलिस की पकड़ से बाहर है।
अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि पप्पू निर्माण कंपनियों से करोड़ों रुपए की उगाही करता था, जिसे बाद में प्रभावशाली लोगों तक पहुंचा दिया जाता था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में तलाशी का पहला दौर 1 अप्रैल को किया था।
ईडी ने तब तलाशी लिए गए कुछ ठिकानों से 1.47 करोड़ रुपए की नकदी के अलावा, 67.64 लाख रुपए मूल्य के सोने के आभूषण और चांदी तथा एक देसी रिवॉल्वर ज़ब्त की थी।
यह जांच कोलकाता पुलिस द्वारा पप्पू के ख़िलाफ़ दर्ज की गई एक एफआईआर से शुरू हुई है, जिसमें उस पर दंगा करने, हत्या के प्रयास, आपराधिक साज़िश और शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन में कथित संलिप्तता का आरोप है।


