एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाई, इसे 'काला कानून' बताया

मुख्यमंत्री ने नामक्कल में विधेयक की प्रति जलाई

एमके स्टालिन ने परिसीमन विधेयक की प्रति जलाई, इसे 'काला कानून' बताया

Photo: MKStalin FB Page

चेन्नई/नामक्कल/दक्षिण भारत। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई और इसे 'काला कानून' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस विधेयक का उद्देश्य तमिल लोगों को उनकी अपनी ही धरती पर 'शरणार्थी' बनाना है।

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संसद का विशेष सत्र शुरू होने से कुछ घंटे पहले, स्टालिन ने एक काला झंडा लहराया और केंद्र सरकार द्वारा जारी परिसीमन विधेयक की एक प्रति जलाई। उन्होंने उसके इस कदम की निंदा करते हुए नारे लगाए।

मुख्यमंत्री ने पश्चिमी तमिलनाडु के नामक्कल में विधेयक की प्रति जलाई, जहां वे चुनाव प्रचार के सिलसिले में डेरा डाले हुए हैं।
 
'पोराडावोम, वेलवोम ओन्ड्रागा' (आइए, हम मिलकर संघर्ष करें और जीतें) — यह उन नारों में से एक था, जिन्हें काले कपड़े पहने स्टालिन और अन्य लोगों ने बुलंद किया।

एक बयान में स्टालिन ने कहा, 'विरोध की लपटें पूरे तमिलनाडु में फैलने दें। फासीवादी भाजपा का अहंकार चूर-चूर हो जाने दें। तब, हिंदी थोपे जाने के खिलाफ तमिलनाडु से उठी विरोध की आग ने दिल्ली को झुलसा दिया था। यह आग तभी शांत हुई, जब दिल्ली को झुकने पर मजबूर होना पड़ा।'

बता दें कि वे 1960 के दशक में राज्य में हुए हिंदी-विरोधी आंदोलन का ज़िक्र कर रहे थे।

उन्होंने कहा, 'आज, मैंने इस 'काले कानून' की प्रति जलाकर और इसके खिलाफ काला झंडा फहराकर उस आग को फिर से भड़का दिया है। यह वो कानून है जो तमिलों को उनकी अपनी ही धरती पर शरणार्थी बनाने की साज़िश रचता है। अब यह आग पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैल जाएगी। यह और भड़केगी, यह और तेज़ होगी, और यह भाजपा के अहंकार को घुटनों पर ला देगी।'

बुधवार को, केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन का कड़ा विरोध करते हुए, उन्होंने पूरे राज्य में काले झंडे लहराकर विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। उनका दावा था कि भाजपा के नेतृत्व वाले राजग का यह कदम तमिलनाडु के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। 

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