'टकराव या बातचीत, ईरान हर स्थिति के लिए तैयार है'
ईरानी संसद के अध्यक्ष का बड़ा बयान
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तेहरान/दक्षिण भारत। इस्लामाबाद वार्ता से लौटने पर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाक़ेर क़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान के साथ धमकियों की भाषा काम नहीं करती। क़ालिबफ़, जिन्होंने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ बातचीत के लिए एक उच्च-स्तरीय ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, ने ईरानी वार्ता टीम के सदस्यों और पत्रकारों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि बातचीत की उनकी कवरेज ने दूसरी तरफ़ से चलाए जा रहे 'मनोवैज्ञानिक अभियानों' का मुक़ाबला करने में मदद की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए क़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान के साथ धमकियों की भाषा काम नहीं करती।उन्होंने कहा कि साल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को सीधे संबोधित करते हुए क़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान टकराव या बातचीत, दोनों ही स्थितियों में उसी तरह जवाब देगा।
उन्होंने कहा, 'अगर आप युद्ध करने आते हैं तो हम आपसे लड़ेंगे। अगर आप तर्क के साथ आगे आते हैं तो हम आपके साथ तार्किक व्यवहार करेंगे। हम किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे। एक बार फिर हमारे संकल्प की परीक्षा ले लीजिए, ताकि हम आपको एक और बड़ा सबक सिखा सकें।'
उन्होंने इस बात को दोहराया कि अमेरिका, ईरान के साथ फिर से विश्वास कायम करने का फ़ैसला करके ही कोई 'रास्ता' निकाल सकता है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन पर ईरानी लोगों का 'कर्ज़' है और उसे अपने पिछले ग़लत कामों की भरपाई करने की कोशिश करनी चाहिए।
शीर्ष सांसद ने कहा कि फरवरी के अंत में अमेरिका-इज़राइल के हमले की शुरुआत के बाद से, इस्लामिक गणराज्य के समर्थन में पूरे देश में हुईं जनसभाओं ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई बातचीत के दौरान देश की स्थिति को मज़बूत किया।
उन्होंने ईरानी लोगों का सड़कों पर पहले से कहीं अधिक मज़बूत मौजूदगी के लिए धन्यवाद दिया, और कहा कि इससे बातचीत करने वाली टीम की ईरान के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता और मज़बूत हुई है।
बता दें कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अमेरिकी वार्ताकारों के साथ 21 घंटे की गहन बातचीत करने के बाद तेहरान लौट आया।


