किस वजह से बेनतीजा रही शांति वार्ता? ईरान ने किया यह दावा
'सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है; शत्रुता से शत्रुता पैदा होती है'
Photo: @araghchi X account
तेहरान/दक्षिण भारत। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने अमेरिका के साथ बेनतीजा बातचीत पर निराशा व्यक्त की और वॉशिंगटन के 'अतिवादी' रवैए के कारण पाकिस्तान में हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय चर्चाओं में सामने आई चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
अराक़ची ने सोमवार को अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा, '47 वर्षों में सर्वोच्च स्तर पर हुई गहन बातचीत में, ईरान ने युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ सद्भावनापूर्वक बातचीत की।'ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, 'लेकिन जब हम ‘इस्लामाबाद एमओयू’ से महज़ कुछ इंच की दूरी पर थे, तो हमें अतिवाद, बदलते लक्ष्यों और रुकावटों का सामना करना पड़ा।'
उन्होंने अमेरिका से कहा, 'कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना पैदा होती है। शत्रुता से शत्रुता पैदा होती है।'
बता दें कि 28 फरवरी को, इस्लामी क्रांति के तत्कालीन नेता आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई और कई सैन्य कमांडरों की हत्या के बाद, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था।
इसके जवाब में, ईरानी सशस्त्र बलों ने 40 दिनों की अवधि में जवाबी हमलों की एक सीरीज को अंजाम दिया, जिसमें उन्होंने इस क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इज़राइली सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और अपनी युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिका और इज़राइल की संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचाया, जिससे यह संघर्ष और लंबा खिंच गया तथा इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
तनाव कम करने की कोशिश में, 8 अप्रैल को दो हफ़्ते के लिए संघर्ष-विराम करवाया गया, जिससे इस्लामाबाद में मध्यस्थता वाली बातचीत हो सकी। इन चर्चाओं के दौरान ईरान ने दस-सूत्रीय योजना पेश की, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाने और अहम 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' पर नियंत्रण की मांग की गई थी।
पाकिस्तान में अमेरिकी वार्ताकारों के साथ 21 घंटे की गहन बातचीत के बावजूद, ईरानी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते पर पहुंचे तेहरान लौट गया। इसके लिए उन्होंने भरोसे की कमी और अमेरिका के राजनीतिक पैंतरेबाज़ी को वजह बताया।


