जिंदगी जीने के तरीके से जीवन बनता है: प्रधानमंत्री

'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम में बोले मोदी

जिंदगी जीने के तरीके से जीवन बनता है: प्रधानमंत्री

Photo: @NarendraModi YouTube Channel

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जब मैंने 'परीक्षा पे चर्चा' शुरू किया तो एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे उसे बदलता जा रहा हूं। इस बार मैंने अलग-अलग राज्यों में भी किया। मैंने भी अपना पैटर्न बदला, लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ा।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षक का प्रयास रहना चाहिए कि विद्यार्थी की स्पीड इतनी है, मेरी स्पीड उससे एक कदम ज्यादा रहनी चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में न हो। मन को जोतो, फिर मन को जोड़ो और फिर आपको पढ़ाई के जो विषय रखने हों, रखो। फिर आप विद्यार्थी को हमेशा सफल पाएंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर चीज में संतुलन होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही गिरोगे। स्किल में भी 2 प्रकार के स्किल हैं। एक है लाइफ स्किल और दूसरा है प्रोफेशनल स्किल। उसमें भी कोई मुझसे पूछेगा कि किसी पर ध्यान देना चाहिए, तो मैं कहूंगा कि दोनों पर ध्यान देना चाहिए। बिना अध्ययन और ऑब्जरवेशन किए और बिना ज्ञान प्रयुक्त किए कोई भी स्किल आ सकता है क्या? स्किल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है, उसका महत्त्व कम नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने उसे कहा कि 25 अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं, बल्कि बचे हुए को गिनता हूं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे देश में बोर्ड एग्जाम में नंबर लाने वाले बच्चे छोटे-छोटे गांव से हैं, पहले बड़े परिवार और बड़ी स्कूल के बच्चे ही नंबर लाते थे। अभी कुछ दिन पहले में ब्लाइंड क्रिकेट टीम की बच्चियों से मिला। वे जीतकर आई थीं। जब मैंने उनको सुना तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। उनके पास घर नहीं है और वो ब्लाइंड हैं, खेलना सीखा और दिव्यांग होने के बावजूद भी यहां तक पहुंचीं। हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिये कि कंफर्ट जोन ही जीवन बनाता है। जीवन बनता है, जिंदगी जीने के तरीके से।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सपने न देखना एक क्राइम है। सपने देखने ही चाहिएं, लेकिन सपनों को गुनगुनाते रहना कभी काम नहीं आता है। इसलिए, जीवन में कर्म को ही प्रधान मानना चाहिए।

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