सोशल मीडिया: सेवा का जरिया या झगड़े का मैदान?
सोशल मीडिया संबंधी आचार संहिता की जरूरत है
सरकार डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है
भारत में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया संबंधी आचार संहिता की जरूरत है। ऐसे कई लोग सोशल मीडिया मंचों पर विवादित, स्तरहीन, अप्रासंगिक, अनावश्यक और अमर्यादित सामग्री प्रसारित कर सुर्खियों में आ जाते हैं। इससे जनता में गलत संदेश जाता है। सरकार डिजिटलीकरण को बढ़ावा दे रही है। वह जनता को सोशल मीडिया के जरिए विभिन्न विकास योजनाओं से जोड़ रही है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों का कर्तव्य है कि वे लोगों को इन योजनाओं के बारे में जानकारी दें। अगर वे इस काम में सोशल मीडिया मंचों का सकारात्मक उपयोग करते हैं तो उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए। कई अधिकारी और कर्मचारी ऐसा कर रहे हैं। वे साइबर सुरक्षा, डाकघर बचत योजना, खेती और पशुपालन संबंधी योजना, सौर ऊर्जा आदि के बारे में बहुत अच्छी और लाभदायक जानकारी दे रहे हैं। ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने सोशल मीडिया को झगड़े का मैदान बना रखा है। एक आईपीएस अधिकारी, जो हाल में सेवानिवृत्त हुए हैं, सोशल मीडिया पर ईश्वर, धर्म और धर्मगुरुओं के खिलाफ टीका-टिप्पणी करते हैं। अगर वे अपराध नियंत्रण और जागरूकता के बारे में जानकारी दें तो समाज को फायदा होगा। क्या दिन-रात ईश्वर के अस्तित्व पर सवाल उठाने से लोगों का भला हो जाएगा? कोई अधिकारी धर्म और ईश्वर में आस्था नहीं रखता है तो वह इसके लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे अपने पद और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। एक आईएएस अधिकारी सोशल मीडिया पर अपनी प्रसिद्धि के लिए जाने जाते हैं। एक बार उन्होंने अपने अकाउंट पर किसी वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ टिप्पणी प्रकाशित की थी। उन्होंने आपसी विवाद को सार्वजनिक मंच पर लाकर खूब किरकिरी कराई थी।
नवंबर 2024 में एक आईएएस अधिकारी कथित तौर पर विवादित वॉट्सऐप ग्रुप बनाने की वजह से चर्चा में रहे थे। हालांकि, बाद में उन्होंने दावा किया कि 'मेरा फोन हैक हो गया था, मैंने ऐसा कोई ग्रुप नहीं बनाया था।' सितंबर 2025 में एक आईएएस अधिकारी ने बाढ़ राहत राशि के बारे में टिप्पणी कर पीएमओ पर निशाना साधा था। बाद में, सरकार ने उन्हें नोटिस दिया था। फरवरी 2026 में एक महिला टीटीई की इंस्टाग्राम रील्स ने लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। वह अपनी ड्यूटी पर कम और रील बनाने पर ज्यादा ध्यान देती थी। वह खुद को एक सेलिब्रिटी की तरह दिखाती थी। उसने अपने अकाउंट पर ऐसी सामग्री पोस्ट की थी, जो किसी रेलवे कर्मचारी को सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए थी। अगर रील बनाने में ही इतनी ऊर्जा और समय लगाएंगे तो काम कब करेंगे? एक बैंक कर्मचारी अपने चैनल पर भर्ती परीक्षाओं की तैयारी, उपयोगी किताबों, सवालों को हल करने के तौर-तरीकों के बारे में जानकारी देती थी। बड़ी संख्या में युवा उसे फॉलो करते थे। उसके द्वारा प्रसारित सामग्री से युवाओं को फायदा हो रहा था। एक दिन उसके दफ्तर में कोई घटना हुई, जिसका विवरण उसने चैनल पर डाल दिया। उसने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बारे में टिप्पणी की थी। वह वीडियो वायरल होकर बैंक के उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया। उस कर्मचारी को नोटिस दिया गया, जिसके बाद उसने वीडियो हटाया। डिजिटल युग में सोशल मीडिया के उपयोग को पूरी तरह प्रतिबंधित करना अव्यावहारिक होगा। अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी एवं सावधानी के साथ सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति होनी चाहिए। इसके लिए स्पष्ट आचार संहिता हो, जो अनुशासन और मर्यादा पर जोर दे। साथ ही, सरकारी सेवाओं को प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो।

