एआई को हावी न होने दें
एआई टूल्स का प्रभाव काफी बढ़ गया है
एआई टूल्स पर विद्यार्थियों की निर्भरता उन्हें पढ़ाई में कमजोर ही बनाएगी
अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के प्राथमिक स्कूलों में एआई के उपयोग को सीमित करने के संबंध में जो फैसला लिया गया है, वह दुनिया के अन्य स्कूलों के लिए एक उदाहरण है। वहां छोटी कक्षाओं के बच्चे अपनी पढ़ाई में एआई का बहुत उपयोग करने लगे थे। इस उम्र में बच्चों को सीखने पर जोर देना चाहिए, जबकि वे एआई पर निर्भर हो रहे थे। अब वे ऐसे टूल्स से दूर रहकर अपने शिक्षकों और किताबों से ही सीखेंगे। पिछले दो वर्षों में एआई टूल्स का प्रभाव काफी बढ़ गया है। इन्हें किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। कई क्षेत्रों में इनका उपयोग काफी लाभदायक है, लेकिन इन पर निर्भरता बढ़ने के खतरे भी कम नहीं हैं। खासकर छोटी कक्षाओं के विद्यार्थियों को इनका सीमित उपयोग करने की ही अनुमति होनी चाहिए। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब शिक्षक ने गृहकार्य दिया तो विद्यार्थियों ने पूरी तैयारी के बाद लिखने के बजाय एआई टूल्स से कॉपी कर पेश कर दिया। जब शिक्षक ने गणित का कोई सवाल हल करने के लिए दिया तो एआई की मदद से पूरे विवरण के साथ उसका जवाब लिखा, लेकिन वैसा ही सवाल कक्षा में हल करने के लिए दिया तो उलझन में पड़ गए। शिक्षकों ने बहुत जल्दी पता लगा लिया कि एआई टूल्स जवाब तो देते हैं, वहीं ये विद्यार्थियों की सोचने-समझने की काबिलियत को धीमा कर देते हैं। अगर कोई विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में कई हफ्तों तक एआई टूल्स पर निर्भर रहेगा तो परीक्षा में उसके प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अस्सी-नब्बे के दशक में जब भारतीय बाजारों में सस्ते व आकर्षक कैलकुलेटर आने लगे थे, तब कई विद्यार्थी गणित की पढ़ाई में इनका उपयोग करते थे। उन्होंने शुरुआत जिज्ञासावश की थी, लेकिन जल्द ही यह उनकी आदत बन गई। जो विद्यार्थी एक महीने तक कैलकुलेटर का उपयोग करने के बाद वापस परंपरागत ढंग से गणित के सवाल हल करता है, उसे काफी कठिनाई होती है। आजकल कुछ लोग यह मांग कर रहे हैं कि बच्चों पर पढ़ाई के बढ़ते दबाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें कैलकुलेटर का उपयोग करने की अनुमति दी जाए! उनका तर्क है कि जब कैलकुलेटर उपलब्ध है, दैनिक जीवन में उसका बहुत उपयोग होता है तो परीक्षा में भी उपयोग की अनुमति मिलनी चाहिए। अगर ऐसा हुआ तो यह मांग यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। उसके बाद कोई व्यक्ति या संगठन यह तर्क देते हुए आंदोलन की घोषणा कर सकता है कि पढ़ाई बहुत मुश्किल हो गई है, लिहाजा हमें परीक्षा में एआई टूल्स का उपयोग करने की पूरी छूट दी जाए! ऐसी विचित्र मांगों का कोई ठोस आधार नहीं होता है। अलबत्ता इतना तय है कि कैलकुलेटर और एआई टूल्स पर विद्यार्थियों की निर्भरता उन्हें पढ़ाई में कमजोर ही बनाएगी। वे अपनी बुद्धि और विवेक से कोई फैसला नहीं ले पाएंगे। भविष्य में, जब जीवन से जुड़ा कोई फैसला लेना होगा तो वे एआई की शरण में जाएंगे। कई लोग एआई टूल्स को जादू की छड़ी समझ रहे हैं। उनका विश्वास है कि ये टूल्स सबकुछ जानते हैं। हाल में एक व्यक्ति ने अपनी मेडिकल रिपोर्ट किसी एआई टूल के साथ साझा कर उससे जानकारी मांगी तो जवाब सुनकर उसके होश उड़ गए। एआई टूल ने ऐसी बीमारियों के लक्षण बताए, जिनके नाम भी उस व्यक्ति ने पहली बार सुने थे। उसे आशंका हुई- कहीं मुझे सच में ये बीमारियां तो नहीं हो गईं? बाद में, उसने एक विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लिया तो पता चला कि उसकी समस्या सामान्य है, जो कुछ दिनों तक दवाइयां लेने से ठीक हो सकती है। पढ़ाई हो या सेहत या कोई अन्य क्षेत्र, एआई को खुद पर हावी न होने दें।

