नेपाली वैज्ञानिकों का दावा- बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़
मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई
Photo: balenOfficial FB Page
काठमांडू/दक्षिण भारत। नेपाली वैज्ञानिकों की एक प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में भोटेकोशी-त्रिशूली कॉरिडोर में आई विनाशकारी बाढ़ आम बारिश की वजह से नहीं, बल्कि ऊंचे हिमालय में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने (एवलांच) से आई थी।
नेपाल एनवायरनमेंट सोसाइटी (एनईएस) द्वारा तैयार कराई गई रिपोर्ट जारी की गई है। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 903 हो गई है और शवों को निकालने का काम जारी है।एक रिपोर्ट के अनुसार, अध्ययन में पाया गया कि रसुवा के लांगटांग-लिरुंग इलाके में लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई से बर्फ, चट्टान और मलबे का एक विशाल ढेर गिरा और ल्हेंडे नदी में जा गिरा। इसके बाद यह बहाव भोटेकोशी से होते हुए त्रिशूली नदी तक पहुंचा, जिससे मलबे से भरी एक ज़बरदस्त बाढ़ आ गई।
26 अगस्त को इस आपदा ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया। अध्ययन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि आपदा ग्लेशियल झील के फटने से बाढ़ के कारण नहीं आई थी।
शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट से ली गईं तस्वीरों, हाइड्रोलॉजिकल और मौसम से जुड़े डेटा, ज़मीन की बनावट और नदी के रास्ते में ऊंचाई और ढलान में आए बदलावों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोफ का कोई सबूत नहीं मिला।
अध्ययन के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे लांगटांग-लिरुंग के उत्तरी हिस्से से बर्फ और चट्टानों का मलबा गिरने लगा। यह मलबा लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई से ढलान वाले रास्ते से नीचे आया और करीब 2,930 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नदी तक पहुंचा।


