डिजिटल नियंत्रण से लागू करें शराबबंदी
शराब बनाने, बेचने और पीने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगना चाहिए
दूध, दही, घी, छाछ, लस्सी, शहद, शर्बत और सत्तू को बढ़ावा मिलना चाहिए
शराब एक बुरी चीज है। यह अपने साथ कई बुराइयां लेकर आती है। अब तकनीक-प्रधान युग में मदिरापान को हतोत्साहित करने के लिए सबसे सुनहरा समय है। तमिलनाडु में शराब के स्टॉक की आपूर्ति डिजिटल करने और दुकानों के लिए हैंडहेल्ड डिवाइस एवं ओटीपी से लॉगिन ज़रूरी किए जाने के फैसले ने ऐसे उपायों के बारे में नई बहस छेड़ दी है। अगर शराब बनाने, बेचने और पीने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए तो सबसे बेहतर होगा। जो सरकारें ऐसे फैसले लागू करती हैं, उन्हें जनसमर्थन मिलता है। इस फैसले का एक पहलू और है। प्राय: ऐसे इलाकों में नकली शराब और तस्करी का धंधा जोर पकड़ने लगता है। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल जाते हैं। जब जहरीली शराब से कई लोगों की मौत हो जाती है तो इसके लिए सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी और मुआवजे की मांग की जाती है। ऐसे में सरकार के सामने एक ही रास्ता बचता है कि वह शराब की बिक्री की इजाजत दे और सेहत का मामला लोगों के विवेक पर छोड़ दे। आजादी से पहले, महात्मा गांधी और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने शराबबंदी के लिए बहुत कोशिशें की थीं। उनके आह्वान पर कई लोगों ने शराब से दूरी बना ली थी। आजादी के बाद, सरकारों को शराब पर सख्ती से प्रतिबंध लगाना चाहिए था, लेकिन उनके फैसलों से इसे बढ़ावा ही मिला। जहां सरकारों ने प्रतिबंध लगाए, वहां भ्रष्टाचारियों और अपराधियों के गठजोड़ ने पूरी मुहिम को बेपटरी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अब सवाल है- जहां सरकारों ने शराब की बिक्री की इजाजत दे रखी है, वहां क्या किया जाए? क्या रातोंरात प्रतिबंध लगा देना चाहिए?
शराब और इससे पैदा होने वाली बुराइयों को खत्म करने के लिए कुछ छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे। पहले, इस चीज को सीमित करें। उसके बाद प्रतिबंध लगाने के बारे में सोचें। सबसे पहले, शराब की बिक्री में नकद लेन-देन को पूरी तरह प्रतिबंधित करें। इसमें डिजिटल पेमेंट अनिवार्य किया जाए। सरकार उस आंकड़े पर कड़ी नजर रखे। इस प्रक्रिया को आधार कार्ड से जोड़ा जाए या इन लोगों के लिए कोई अलग कार्ड शुरू किया जाए, जिसके लिए आवेदन और शुल्क ऑनलाइन ही स्वीकार किए जाएं। कौन व्यक्ति शराब पर कितने रुपए खर्च करता है, इसका एआई से विश्लेषण किया जाए। जो आंकड़े प्राप्त हों, उनके आधार पर आर्थिक नीतियां बनाई जाएं। जैसे- जिस बैंक खाते से शराब खरीदी जाती है, उस पर कम ब्याज दिया जाए। इन लोगों को दी जा रही सब्सिडी में कटौती की जाए। इन्हें पेट्रोल, डीजल, गैस सिलेंडर, सार्वजनिक परिवहन टिकट की कीमतों में कम रियायत दी जाए। जो व्यक्ति शराब पीकर सार्वजनिक शांति भंग करे, किसी से मारपीट करे, उससे दंडस्वरूप सार्वजनिक स्थानों, शौचालयों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों आदि की सफाई कराई जाए। कुछ लोग अपनी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा शराब पीने पर उड़ा देते हैं। वे बैंक खाते में वेतन आते ही ठेके की ओर दौड़ पड़ते हैं। कई तो जुआ, सट्टा जैसी गंभीर बुराइयों के दलदल में फंस जाते हैं। उनके परिजन उनसे हमेशा दु:खी रहते हैं। ऐसे लोगों को जिम्मेदारी का बोध कराने के लिए उनके वेतन का एक निश्चित हिस्सा माता-पिता या पत्नी के बैंक खाते में भेजा जाए। सरकारों को ऐसे कानूनी प्रावधान लागू करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए। जो अधिकारी और कर्मचारी नकली शराब के निर्माण और बिक्री तथा तस्करी में लिप्त पाए जाएं, उनकी संपत्ति जब्त करते हुए उन्हें उम्रकैद दी जाए। भारत देवी-देवताओं की भूमि है। यहां दूध, दही, घी, छाछ, लस्सी, शहद, शर्बत और सत्तू को बढ़ावा मिलना चाहिए। इस देश में शराब के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

