इन संकल्पों से बनेगा विकसित भारत
प्रधानमंत्री ने नौ सामूहिक संकल्पों का उल्लेख किया
स्वदेशी चीजों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विकसित कर्नाटक और विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिन नौ सामूहिक संकल्पों का उल्लेख किया है, उन्हें सबको जीवन में उतारने की जरूरत है। अगर ये संकल्प सबके जीवन का हिस्सा बन जाएं तो देश में कई समस्याओं का ठोस समाधान हो जाए। प्रधानमंत्री ने पानी बचाने और उसके बेहतर प्रबंधन को सर्वोच्च स्थान देकर इसके महत्त्व को रेखांकित किया है। भारत में छोटी-बड़ी नदियों, झीलों, बावड़ियों, तालाबों आदि की गिनती करें तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा है। इसके बावजूद कई इलाकों में पेयजल की किल्लत बनी रहती है। भूजल का स्तर भी नीचे जा रहा है। देशवासियों को इसे बहुत गंभीरता से लेना चाहिए। हर साल पौधे लगाने की बातें खूब होती हैं, लगाए भी जाते हैं, लेकिन उनमें से कितने पौधों की उचित देखभाल की जाती है और वे बड़े हो पाते हैं? प्रधानमंत्री ने 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान चलाकर उन पौधों को पेड़ बनाने का मार्ग प्रशस्त किया है। सबको अपनी मां के साथ गहरा लगाव होता है। अगर उक्त अभियान को गंभीरता से आगे बढ़ाया जाए तो कुछ ही वर्षों में पूरा देश हरा-भरा हो सकता है। प्रधानमंत्री स्वच्छता पर बहुत जोर देते हैं। वे स्वच्छता बनाए रखने के लिए विभिन्न मंचों से अपील कर चुके हैं। देश को स्वच्छ बनाने में योगदान देना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। अगर आजादी के इतने दशक बाद भी सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी के ढेर मिलते हैं तो इससे पता चलता है कि हम अपनी जिम्मेदारी निभाने में सफल नहीं हो रहे हैं।
प्रधानमंत्री द्वारा 'वोकल फॉर लोकल' संबंधी आह्वान देश को आत्मनिर्भर बना सकता है। हमें स्वदेशी चीजों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। यही वह तरीका है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपए को मजबूत बना सकते हैं और बेरोजगारी को दूर कर सकते हैं। अपने देश में पर्यटन को बढ़ावा देना भी 'स्वदेशी और आत्मनिर्भरता' से जोड़ता है। भारत में घूमने के लिए सुंदर जगहों की कोई कमी नहीं है। लोग इस बात को समझ रहे हैं और छुट्टियों में वहां भीड़ उमड़ रही है। प्रधानमंत्री ने किसानों से 'केमिकल फ्री' खेती का आह्वान कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही है। कई किसान ऐसा कर भी रहे हैं। प्राकृतिक खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्राकृतिक खाद और कीटनाशक बनाने का प्रशिक्षण देना चाहिए। देश में नीम, आक, धतूरा जैसे दर्जनों पौधे हैं, जिनका सही इस्तेमाल जहरीले कीटनाशकों पर निर्भरता बहुत कम कर सकता है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से मोटे अनाजों का महत्त्व खूब समझा रही है। इससे प्रभावित होकर लोग अपने भोजन में इन्हें शामिल कर रहे हैं। ये अनाज मानव और धरती, दोनों की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। योगाभ्यास और खेलकूद को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। जिन देशों में लोग ज्यादा स्वस्थ रहते हैं, लंबी उम्र तक जीते हैं, वहां अच्छे अस्पताल तो हैं ही; खेलकूद के लिए अच्छे मैदान भी हैं। जापान में बड़े शहरों से लेकर सुदूर गांवों तक सुंदर बगीचे बने हुए हैं। वहां कोई व्यक्ति साइकिल चलाना चाहता है तो उसके लिए सड़कें काफी सुरक्षित हैं। क्या हम ऐसी व्यवस्था अपने देश में नहीं बना सकते? बच्चों को स्कूली दिनों में ही खेलकूद, व्यायाम और साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे वे ज्यादा स्वस्थ रहेंगे और देश को सशक्त बनाएंगे। स्वस्थ लोग अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करते हैं और सेवा संबंधी गतिविधियों से जुड़कर प्रशंसनीय योगदान दे पाते हैं।

