'हम 2, हमारे 0': जापानी समाज की राह पर क्यों चल रहे ये भारतीय दंपति?

घटती जन्म दर से बदल रही भविष्य की तस्वीर

'हम 2, हमारे 0': जापानी समाज की राह पर क्यों चल रहे ये भारतीय दंपति?

Photo: PixaBay

.. सुचिस्मिता अग्रवाल ..

Dakshin Bharat at Google News
बेंगलूरु/दक्षिण भारत। भारत लंबे समय से अपनी बढ़ती जनसंख्या को एक चुनौती के रूप में देखता रहा है, लेकिन हालिया आंकड़े एक नई स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) अब प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से नीचे गिरकर 2.0 पर आ गई है। 

यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि इसका अर्थ है कि भविष्य में हमारी जनसंख्या बढ़ने के बजाय स्थिर होने या घटने लगेगी। विशेषकर शहरों में यह गिरावट बहुत स्पष्ट है, जहां कई युवा दंपति अब एक भी संतान न होने की राह चुन रहे हैं। इसके पीछे बढ़ती महंगाई, करियर की गलाकाट प्रतिस्पर्धा और बच्चों की शिक्षा व परवरिश पर होने वाला भारी खर्च मुख्य कारण हैं। आज की जीवनशैली में 'पर्सनल स्पेस' और वित्तीय स्वतंत्रता की चाहत ने पारंपरिक पारिवारिक ढांचे को पीछे छोड़ दिया है।

यह संकट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्वी एशिया के देशों में यह एक चेतावनी की तरह उभर चुका है। दक्षिण कोरिया की प्रजनन दर दुनिया में सबसे कम (0.72) हो गई है, जबकि जापान दशकों से इस जनसांख्यिकीय जाल में फंसा हुआ है। वहां स्थिति इतनी विकट है कि कई ग्रामीण मोहल्लों और शहरों में सालभर से किसी बच्चे का जन्म नहीं हुआ है। वहां के स्कूल बंद हो रहे हैं और खेल के मैदान वीरान पड़े हैं, क्योंकि आबादी का बड़ा हिस्सा अब बुजुर्गों का है। 

यदि भारत के संदर्भ में देखें, तो क्षेत्रीय स्तर पर बड़ा असंतुलन दिखाई देता है। सिक्किम, गोवा, लद्दाख और केरल जैसे राज्यों में जन्म दर राष्ट्रीय औसत से बहुत नीचे जा चुकी है। इन राज्यों में समाज तेजी से 'बूढ़ा' हो रहा है, जो आने वाले समय में आर्थिक और सामाजिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

भविष्य में इस स्थिति से कई जटिल चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। सबसे बड़ी समस्या कार्यबल की कमी होगी, क्योंकि काम करने वाले युवाओं की तुलना में आश्रित बुजुर्गों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ सकती है। 

इस संकट का समाधान केवल जनसंख्या नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सामाजिक और ढांचागत बदलाव की आवश्यकता है। सरकार को कामकाजी माता-पिता के लिए बेहतर चाइल्डकेयर सुविधाएं, कर में राहत और कार्यस्थल पर लचीले काम के घंटे जैसे प्रोत्साहन देने होंगे। जब तक समाज और प्रशासन मिलकर बच्चों के पालन-पोषण को आसान और किफायती नहीं बनाएंगे, तब तक जन्म दर के इस गिरते ग्राफ को थामना मुश्किल होगा।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download