गणतंत्र दिवस से पहले 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री मोदी

देशवासियों के नाम मोदी का संदेश

गणतंत्र दिवस से पहले 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री मोदी

Photo: @NarendraModi YouTube Channel

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर देशवासियों के सा​थ अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आज 25 जनवरी का दिन भी बहुत अहम है। आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस है। मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयां बांटी जाएं। इससे लोगों में मतदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। 18 साल का होने पर मतदाता के रूप में खुद को जरूर रजिस्टर करें।

Dakshin Bharat at Google News
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इको-सिस्टम बन चुका है। स्टार्टअप इंडिया की यात्रा, इस अद्भुत यात्रा के हीरो हमारे युवा साथी हैं। अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर उन्होंने जो इनोवेशन किए, वे इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। एआई, स्पेस, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी ... आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय स्टार्टअप उस सेक्टर में काम करते हुए दिख जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी इस क्षेत्र के लोगों के जन-जीवन की धुरी हुआ करती थी, लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। इसके बाद यहां के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की गई और उसके किनारों पर छायादार, फलदार पेड़ लगाए गए। स्थानीय लोग कर्तव्य भावना से इस काम में जुटे और सबके प्रयास से नदी का पुनरुद्धार हो गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश का अनंतपुर, जो सूखे की गम्भीर समस्या से जूझता रहा है, यहां की मिट्टी, लाल और बलुई है। यही वजह है कि लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिये स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। फिर प्रशासन के सहयोग से यहां 'अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट' की शुरुआत हुई। इस प्रयास के तहत 10 से अधिक जलाशयों को जीवन दान मिला है। उन जलाशयों में अब पानी भरने लगा है। इसके साथ ही 7,000 से अधिक पेड़ भी लगाए गए हैं। यानी अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रीन कवर भी बढ़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भजन क्लबिंग ... यह खासतौर पर जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। न शब्दों की मर्यादा टूटती है और न ही भाव की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मलेशिया में हमारा भारतीय समुदाय बहुत सराहनीय कार्य कर रहा है। वहां 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल भाषा की पढ़ाई के साथ ही अन्य विषयों को भी तमिल में पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यहां तेलुगु और पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं पर भी बहुत फोकस रहता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात में बेचराजी के चंदनकी गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। अगर मैं आपसे कहूं कि यहां के लोग, विशेषकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते तो आपको हैरत होगी। इसकी वजह गांव का शानदार सामुदायिक रसोईघर है। इसमें एक साथ पूरे गांव का सबका खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 वर्षों से यह परंपरा निरंतर चली आ रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे अनंतनाग के शेखगुन्ड गांव के बारे में जानकारी मिली है। यहां ड्रग्स, तंबाकू, सिगरेट और शराब से जुड़ी चुनौतियां काफी बढ़ गई थीं। इन सबको देखकर यहां के मीर जाफ़र इतने परेशान हुए कि उन्होंने इस समस्या को दूर करने की ठान ली। उन्होंने गांव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को एकजुट किया। उनकी इस पहल का असर कुछ ऐसा रहा कि वहां की दुकानों ने तंबाकू उत्पादों को बेचना ही बंद कर दिया। इस प्रयास से ड्रग्स के खतरों को लेकर भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में हुए एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में मुझे जानकारी मिली है। ईटानगर में युवाओं का समूह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जिन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी। इन युवाओं ने अलग-अलग शहरों में सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई को अपना मिशन बना लिया। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम के नागांव में वहां की पुरानी गलियों से लोग भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को मिलकर साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उनके साथ और लोग जुड़ते गए। इस तरह एक ऐसी टीम तैयार हो गई, जिसने गलियों से बहुत सारा कचरा हटा दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में पन्ना जिले के जगदीश प्रसाद अहिरवार का प्रयास भी बहुत ही सराहनीय है। वे जंगल में बीट-गार्ड के रूप में अपनी सेवाएं देते हैं। एक बार गश्त के दौरान उन्होंने महसूस किया कि जंगल में मौजूद कई औषधीय पौधों की जानकारी कहीं भी व्यवस्थित रूप से दर्ज नहीं है। वे यह जानकारी अगली पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने औषधीय पौधों की पहचान करना और उनका रिकॉर्ड बनाना शुरू किया। उन्होंने सवा-सौ से ज्यादा औषधीय पौधों की पहचान की। हर पौधे की तस्वीर, नाम, उपयोग और मिलने के स्थान की जानकारी जुटाई।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download