ट्विशा शर्मा मामले में उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा?
'जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और तटस्थ हो'
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मीडिया से कहा कि वह पूर्व मॉडल एवं अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग करते समय संयम बरते। उसने कहा कि मामले को जिस तरह से संभाला गया, उससे दुख हुआ है।
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में अपने ससुराल में फंदे से लटकी मिली थीं। उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। हालांकि, उनके ससुराल वालों का दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी।पुलिस ने महिला के पति समर्थ सिंह और उसकी सास पूर्व ज़िला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज उत्पीड़न के आरोपों में एफआईआर दर्ज की है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले में जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और तटस्थ हो।
पीठ ने कहा, 'कुछ घटनाओं की वजह से हमें थोड़ा दुख हुआ है। हम अपने मीडिया के मित्रों से अनुरोध करेंगे कि वे पीड़ित परिवार या दूसरे परिवार के बयानों के पीछे न पड़ें। चीज़ों को कानून और प्रक्रिया के अनुसार ही चलने दें।'
उसने कहा, 'हम मीडिया से अनुरोध करते हैं कि वे पीड़ित परिवार के बयान रिकॉर्ड न करें और उनके दर्द को सिर्फ़ 'साउंड बाइट्स' (छोटी-छोटी क्लिप्स) तक सीमित न करें।' यह भी कहा कि किसी भी तरह की मनगढ़ंत कहानी बनाने से बचना चाहिए।
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया के दखल के कारण इस मामले में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि यह मामला सभी माता-पिता के लिए एक संदेश है कि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सामना करने के बजाय एक तलाकशुदा बेटी होना बेहतर है।
शीर्ष न्यायालय ने सॉलिसिटर जनरल की इस दलील को संज्ञान में लिया कि वे अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाएंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सीबीआई तत्काल जांच अपने हाथ में ले ले।
पीठ ने कहा, 'हम पीड़िता के परिवार वालों के साथ-साथ आरोपी के परिवार वालों पर भी यह ज़ोर देकर कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक तौर पर या किसी मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के सामने बयान देने के बजाय अपने बयान जांच एजेंसी के सामने दर्ज करवाएं, ताकि चल रही जांच पर कोई बुरा असर न पड़े।'


