घुसपैठियों को डर क्यों नहीं?

हर ट्रेन में ऐसा अभियान चलाना चाहिए

घुसपैठियों को डर क्यों नहीं?

घुसपैठियों पर कड़ी नजर रखी जाए

रेलवे सुरक्षा बल ने पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी रोड स्टेशन पर नॉर्थ-ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन से 14 बांग्लादेशियों को गिरफ्तार कर अपना कर्तव्य सजगता से निभाया है। इसके लिए बल के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना होनी चाहिए। भारत में एक भी घुसपैठिया नहीं रहना चाहिए। क्या हमारे देश ने दुनियाभर के घुसपैठियों को पालने की कोई जिम्मेदारी ले रखी है? इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अगर एक ट्रेन में इतने बांग्लादेशी भरे हुए हैं तो अन्य ट्रेनों में कितने होंगे? केंद्र सरकार को हर ट्रेन में ऐसा अभियान चलाना चाहिए। इसके लिए खुफिया एजेंसियों की मदद ली जाए। हर स्टेशन पर खुफिया नेटवर्क का विस्तार करते हुए घुसपैठियों पर कड़ी नजर रखी जाए। साथ ही, रेलवे सुरक्षा बल के जवानों को विशेष प्रशिक्षण देकर तैनात किया जाए, ताकि कोई भी घुसपैठिया उनकी नजरों से बच न पाए। जो बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए, उनके पास फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड पाए गए हैं। यही नहीं, उनके कब्जे से मोबाइल फोन मिले हैं। बड़ा सवाल है- इन्हें फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाकर किसने दिए? जो लोग इस फर्जीवाड़े में शामिल हैं, क्या वे राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं? क्या उनका अपराध देशद्रोह के समान नहीं है? घुसपैठियों के पास मोबाइल फोन बहुत खतरनाक हो सकता है। अगर ये लोग ट्रेनों में घूमते हुए विभिन्न स्टेशनों, पुलों, बिजलीघरों, बड़ी नहरों, बांधों और अन्य इलाकों की तस्वीरें लेकर दुश्मन एजेंसियों को भेज दें तो कितना बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है? पिछले साल जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था, तब भारत के महत्त्वपूर्ण स्थान पाकिस्तान के निशाने पर थे। उस समय जासूसी के आरोप में कई लोग पकड़े गए थे।

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क्या बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले घुसपैठियों को आईएसआई अपने फायदे के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकती? सवाल यह भी है कि घुसपैठियों को कोई डर क्यों नहीं है? वे भारत में आकर इतनी आसानी से दस्तावेज बनवा लेते हैं, खाली जमीन पर कब्जा कर झुग्गी बना लेते हैं, सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं। ऐसे भी मामले आए हैं, जब किसी बांग्लादेशी घुसपैठिए को पकड़कर स्वदेश रवाना किया गया, लेकिन कुछ दिन बाद वह दोबारा आ गया! ये घुसपैठिए चीन जाकर फर्जी दस्तावेज क्यों नहीं बनवाते? ये बीजिंग में जमीन पर कब्जा कर झुग्गी क्यों नहीं बनाते? ये चीन की ट्रेनों में निडर होकर सफर क्यों नहीं करते? इनका एक ही जवाब है- कानून का डर। चीन में घुसपैठियों को बहुत सख्त सजा दी जाती है। जो व्यक्ति इनकी मदद करता है, वह भी सजा के दायरे में आता है। चीन ने अपने भू-भाग पर कैमरों का जाल बिछा रखा है। वहां जो व्यक्ति जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा करेगा, उस पर झुग्गी बनाएगा, वह तुरंत एजेंसियों की पकड़ में आ जाएगा। इसके बाद उसकी बढ़िया ढंग से 'खातिरदारी' होगी। क्या हम अपने देश को घुसपैठियों से मुक्त कराने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा सकते? अभी हर गांव-शहर में सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे लगाना संभव नहीं है, लेकिन हर जगह भारतीय नागरिक तो हैं! अगर सरकार इच्छाशक्ति दिखाए तो नागरिक ही उसे जानकारी भेज देंगे। अक्सर खबरें आती हैं- 'फलां शहर में बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े गए ... उन्हें स्वदेश भेज दिया गया।' क्या यह कोई सजा है? घुसपैठिए पकड़े जाते हैं, कुछ दिनों के लिए जेल जाते हैं, फिर अपने देश भेज दिए जाते हैं। इससे उन्हें क्या नुकसान हुआ? इस बात की क्या गारंटी है कि ये दोबारा नहीं आएंगे? जब तक घुसपैठियों को भारी नुकसान का डर नहीं होगा, यह सिलसिला चलता रहेगा। घुसपैठियों के मन में डर होना ही चाहिए। भारतीय एजेंसियां यह सुनिश्चित करें कि हर घुसपैठिए को पकड़े जाने और सख्त सजा मिलने का डर हो। अन्यथा वे आते रहेंगे और हमारे संसाधनों पर मौज उड़ाते रहेंगे।

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