स्वास्थ्य क्रांति का नया अध्याय

इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं

स्वास्थ्य क्रांति का नया अध्याय

भारत को तेजी से आगे बढ़ना होगा

राष्ट्रीय राजधानी स्थित भारत मंडपम में 'एआई इंपैक्ट समिट 2026' में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कमाल पूरी दुनिया ने देखा। अगला एक दशक परिवर्तन की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण होगा। हर क्षेत्र पर एआई का असर पड़ेगा। यह निर्णायक समय है, जब हम इसके जरिए दशकों या सदियों पुरानी समस्याओं के समाधान ढूंढ़ सकते हैं। साथ ही, अपने अनुभवों से कई देशों को लाभान्वित कर सकते हैं। भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में एआई की सख्त जरूरत है। हमारे वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सा विशेषज्ञों और उद्यमियों को मिलकर ऐसे एआई समाधान ढूंढ़ने चाहिएं, जो गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा सकें। कल्पना कीजिए, भारत के पास एक ऐसा शक्तिशाली एआई समाधान हो, जो पलक झपकते ही किसी मरीज की बीमारी का पता लगा ले तो चिकित्सक पर दबाव कितना कम हो सकता है! चीन ने इस दिशा में कुछ प्रगति की है। वहां अस्पतालों में 'एआई चिकित्सक' दिखाई देने लगे हैं। हालांकि अभी इस तकनीक में बहुत विकास की जरूरत है। लोगों के स्वास्थ्य को सिर्फ एआई के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। खासकर जब यह शुरुआती दौर में ही हो। जैसे-जैसे यह तकनीक उन्नत होती जाएगी, इसका प्रदर्शन बेहतर होता जाएगा। अत्यंत कुशल एआई समाधान चिकित्सक की जगह नहीं लेगा, बल्कि उसका साथी बनकर मरीजों की सेवा करेगा। यह तकनीक भविष्य में अस्पतालों को पूरी तरह बदल देने की शक्ति एवं सामर्थ्य रखती है। हो सकता है कि कुछ साल बाद अस्पतालों में ऐसे नजारे आम हों- आज 'क' की तबीयत खराब है। वह अस्पताल गया, जहां चिकित्सक के पास एक 'एआई साथी' बैठा था। उसने हाथ मिलाकर 'क' का अभिवादन किया और आधार डेटा का अवलोकन कर लिया। उसने 'क' का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि चिंता करने की बात नहीं है, अभी समस्या की असल वजह का पता चल जाएगा।

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वह सभी लक्षणों पर गौर करते हुए कुछ जरूरी जांच करेगा और बीमारी का पता लगा लेगा। इसके बाद जरूरी दवाइयां बताएगा, जिन पर चिकित्सक की नजर रहेगी। चिकित्सक द्वारा निर्देश दिए जाने के बाद कागज पर पूरा विवरण प्रिंट कर देगा। 'क' के लिए विकल्प रहेगा कि वह हिंदी, अंग्रेजी या किसी भी भाषा में विवरण प्राप्त करे। 'क' को स्वस्थ जीवन के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, अपने भोजन में किन पदार्थों को शामिल करना चाहिए, कितना पानी पीना चाहिए और कितने घंटे सोना चाहिए - यह पूरी जानकारी एआई साथी देगा। यही नहीं, वह 'क' की चिकित्सा रिपोर्टों का विश्लेषण करने के बाद भविष्य में होने वाली कई बीमारियों का पहले ही पता लगाने में सक्षम होगा। वह डराएगा नहीं, बल्कि समझाएगा। उसकी सलाह सुनकर हर मरीज मुस्कुराते हुए अपने घर जाएगा। चिकित्सक का यह साथी बिल्कुल नहीं थकेगा। जब एक चिकित्सक अपनी ड्यूटी के बाद घर जाएगा तो वह उसकी जगह आने वाले दूसरे चिकित्सक के साथ भी इसी तरह पूरी ऊर्जा से काम करेगा। सोचिए, इससे मानवता का कितना कल्याण हो सकता है? हमारे देश के सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छिपी हुई नहीं है। वहां पर्याप्त चिकित्सक न होने के कारण मरीज तो परेशान होते ही हैं, चिकित्सक भी बहुत दबाव में होते हैं। मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। एक चिकित्सक कितने मरीजों को ध्यान से देखेगा? वह कितने मरीजों को पर्याप्त समय दे सकेगा? सरकारें अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे करती हैं, कई सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन अभी सुधार की काफी गुंजाइश है। जब चिकित्सक के साथ ऐसा एआई साथी मोर्चा संभाल लेगा, तब छोटा-सा अस्पताल भी एक दिन में हजारों मरीजों का इलाज करने में सक्षम हो जाएगा। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। भारत को तेजी से आगे बढ़ना होगा।

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