फिर एक नया शिगूफा

भारत में पहले भी टूल किट का पर्दाफाश हो चुका है

फिर एक नया शिगूफा

भीड़ को उकसाना आसान होता है

देश-दुनिया में कुछ ऐसे तत्त्व सक्रिय हैं, जिनकी खास मंशा है कि किसी तरह एक मौका मिले और वे भारत को अस्थिर करें। जब उनकी तमाम साजिशें नाकाम हो गईं तो अब नया शिगूफा छेड़ दिया- 'कॉकरोच जनता पार्टी'। इसके पीछे छिपे तत्त्वों को उम्मीद है कि शायद इस बार हमारी नैया पार हो जाए, लेकिन उनके अरमानों पर पानी फिर गया। हालांकि सोशल मीडिया पर ऐसी हरकतें लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेती हैं। वहीं, जनता काफी सतर्क है कि यह हमारी भावनाओं को भड़का कर सत्ता हथियाने का कोई प्रयोग न हो। लोग पहले ही ऐसे प्रयोगकर्ताओं द्वारा ठगे जा चुके हैं, इसलिए कोई जोखिम नहीं लेना चाहते हैं। कथित पार्टी के नाम से ही स्पष्ट है कि यह कोई गंभीर राजनीतिक प्रयास नहीं, बल्कि एक खास आयु वर्ग को लुभाकर हुड़दंग मचाने का कार्यक्रम है। भारत में पहले भी टूल किट का पर्दाफाश हो चुका है। लोगों के दिलो-दिमाग से खेलने की चालें काफी पुरानी हैं। कुछ खुफिया एजेंसियों को इस काम में महारत हासिल है। उनकी नजरें उस गिद्ध जैसी होती हैं, जो हमेशा अपने शिकार की तलाश में रहता है। किसके घर में उसके ही सदस्यों से कैसे आग लगवानी है, उसके बाद किस तरह अपनी रोटी सेकनी है ... यही उनका पेशा है। भीड़ को उकसाना आसान होता है। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे तत्त्वों को नया हथियार मिल गया है। अब वे अपने घर में बैठे-बैठे ही विदेशों में अशांति फैला सकते हैं। भीड़ की एक खास आदत होती है- वह सोचने-समझने की कोशिश नहीं करती। अगर किसी दिशा में पचास लोग भागे जा रहे हैं तो अगले चौराहे तक यह संख्या अपनेआप बढ़ जाएगी। अगर किसी मोहल्ले में पांच लोग मशीन से खुदाई कर रहे हैं तो आते-जाते लोग वहां इकट्ठे हो जाएंगे और हर कोई अपनी राय देगा।

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हाल में एक मशहूर ब्रांड की घड़ी बिक्री के लिए पेश की गई तो उसे खरीदने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। उसमें कई लोगों को घड़ी के बारे में पता ही नहीं था। जब उनसे पूछा गया तो जवाब मिला, 'सब लोग इधर आ रहे थे तो हम भी आ गए!' यही मानसिकता कथित कॉकरोच जनता पार्टी के अचानक उभरने की वजह है। लोगों के जीवन में पहले से ही कई समस्याएं हैं। प्रशासन से काफी शिकायतें हैं। उनकी उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, जबकि काम उस स्तर पर हो नहीं रहे हैं। सोशल मीडिया पर जैसी सामग्री आ रही है, उसे देखकर निराशा पैदा होती है। सरकारी दफ्तरों में घूसखोरी के रोग का कोई पुख्ता इलाज नहीं हो रहा है। इन सबसे मन में दबी भड़ास जोर मारती है और जब व्यवस्था के विरोध में कोई स्वर उभरता है तो लोग उसे हाथोंहाथ लेते हैं। उनके मन में उम्मीद पैदा होती है कि 'इससे कुछ बेहतरी आ सकती है ... ये कुछ सुधार कर सकते हैं ... शायद इससे हमारी तकलीफें दूर हो सकती हैं।' लोग उनकी बातों पर आंखें मूंदकर विश्वास करने लगते हैं। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के नाम पर साइबर ठगी की कोशिशें भी शुरू हो चुकी हैं। इस संबंध में पंजाब पुलिस को परामर्श जारी करना पड़ा है। लोगों के पास वॉट्सऐप पर एक लिंक आता है। उनसे कहा जाता है कि इस पर क्लिक कर पार्टी के सदस्य बन सकते हैं। वे जैसे ही उस लिंक पर क्लिक करते हैं, उनके मोबाइल फोन में वायरस-युक्त फाइल इंस्टॉल हो जाती है। उसके बाद मोबाइल फोन पर साइबर ठगों का नियंत्रण हो जाता है। वे निजी तस्वीरें, दस्तावेज और अन्य सामग्री चुरा सकते हैं। साथ ही, बैंक खातों में सेंध लगाकर रकम उड़ा सकते हैं। यही नहीं, वे उस व्यक्ति के नाम पर कर्ज ले सकते हैं। भावनाओं में बहकर लिया गया ऐसा फैसला बहुत महंगा पड़ सकता है। सावधान रहें!

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