व्यवस्था में सुधार से बनेगा विकसित भारत

हर साल बेरोजगारों की भीड़ बढ़ती जा रही है

व्यवस्था में सुधार से बनेगा विकसित भारत

विद्यार्थियों को वह सिखाएं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए जिन सुधारों पर जोर दिया है, वे आज अत्यंत प्रासंगिक हैं। लोग खुशहाल हों, उनका जीवन आसान हो, इसके लिए व्यवस्था में तेजी से कई सुधार करने होंगे। सबसे पहले, सरकारी सेवाओं को आसान बनाने की जरूरत है। लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। चाहे जन्म प्रमाणपत्र लेना हो या बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करना हो, सारे काम घर बैठे हो जाएं। आवेदन ऑनलाइन स्वीकार किए जाएं और जो शुल्क हो, वह ऑनलाइन ही जमा हो। काम पूरा होने की अवधि निश्चित कर दी जाए। कोई कर्मचारी अनुचित तरीके से फाइल को रोके तो उससे जवाब मांगा जाए। दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सरकारी सेवाओं में एआई का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। पिछले एक दशक में सरकारी सेवाओं को आसान बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी सुधार की बहुत गुंजाइश है। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार बहुत बड़ी समस्या है। सरकार को इस पर जोरदार प्रहार करना चाहिए। भारत में न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। इसमें बहुत संसाधन खर्च होते हैं। इस प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत है। छोटे विवादों, यातायात संबंधी मामलों, किराया विवादों, छोटे व्यापारिक विवादों आदि का ऑनलाइन निपटारा किया जाए। हर छोटे विवाद को अदालत में भेजने के बजाय स्थानीय मध्यस्थता से सुलझाया जाए। पुलिस प्रणाली में तो ढेरों सुधार करने की जरूरत है। भारत में आम आदमी पुलिस से मदद मांगने से डरता है। अगर उसे थाने जाना हो तो वह ऐसे व्यक्ति को साथ ले जाना चाहता है, जिसकी वहां जान-पहचान हो। ऑनलाइन एफआईआर से लेकर शिकायत ट्रैकिंग, फोरेंसिक ढांचे में बड़े सुधार करने होंगे। आम जनता को सताने वाले, रिश्वत लेने वाले और अपने कृत्यों से पुलिस बल की छवि पर दाग लगाने वाले कर्मियों को सिर्फ निलंबित न किया जाए। निलंबन कोई सजा नहीं है। उन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा जाए।

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पिछले चार दशकों में स्कूलों और कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इतनी तेजी से कौशल विकास नहीं हुआ है। विद्यार्थी किताबें खूब पढ़ रहे हैं, परीक्षाओं में अच्छे अंक ला रहे हैं। फिर भी रोजगार से वंचित हैं। हर साल बेरोजगारों की भीड़ बढ़ती जा रही है। अब शिक्षा को कौशल से जोड़ने की जरूरत है। विद्यार्थियों को वह सिखाएं, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। जो जानकारी सिर्फ बस्ते का बोझ बढ़ाए और जीवन में कोई काम न आए, उसे या तो हटाएं या सीमित करें। कोरोना महामारी के बाद लोगों को अच्छे स्वास्थ्य का महत्त्व समझ में आ रहा है। इस मामले में सरकार को दो स्तर पर काम करना होगा। सबसे पहले तो चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाएं। जिन बीमारियों में सिर्फ परामर्श और दवाइयों की जरूरत होती है, उनके इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर न लगाने पड़ें। ऐसे मरीजों को ऑनलाइन वीडियो के जरिए परामर्श मिले। अगर कोई जांच करानी हो तो वह लिख दी जाए। उसकी रिपोर्ट डॉक्टर ऑनलाइन देखकर दवाइयां बताएं और परामर्श दें। इससे अस्पतालों पर दबाव काफी कम हो सकता है। सरकार हर गांव और शहर में जनसहयोग से बगीचे विकसित करने पर जोर दे। लोगों को प्रोत्साहित किया जाए कि वे सुबह-शाम सैर करें। उन्हें योग, प्राणायाम, व्यायाम, खेलकूद और पोषक तत्त्वों के बारे में जानकारी दी जाए। इससे वे कई बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे। ऐसा माहौल बनाया जाए, जिसमें लोग अच्छी आदतें अपनाने के लिए आगे आएं। उन्हें लगना चाहिए कि अच्छा नागरिक बनने के बहुत फायदे हैं। अगर कोई व्यक्ति यातायात के सभी नियमों का पालन करे, समय पर पानी-बिजली के बिल जमा कराए, समय पर सभी करों का भुगतान करे, हमेशा टिकट लेकर यात्रा करे... उसे ईंधन खरीद से लेकर विभिन्न योजनाओं तक विशेष छूट मिलनी चाहिए। जितने ज्यादा लोग अच्छाई की ओर कदम बढ़ाएंगे, वे उतनी जल्दी विकसित भारत का निर्माण करेंगे।

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