ईरान की सेना ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए

युद्ध में हार नहीं मान रहा ईरान

ईरान की सेना ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले किए

खामेनेई के एक्स अकाउंट @Khamenei_fa पर पोस्ट किया गया एक सांकेतिक चित्र

तेहरान/दक्षिण भारत। ईरानी सेना ने कहा है कि उसने बुनियादी ढांचे पर हाल में हुए अमेरिकी हमलों के जवाबी कार्रवाई में, जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य सहायता सुविधाओं के साथ-साथ बहरीन में एक प्रमुख एल्यूमीनियम उत्पादन संयंत्र को निशाना बनाते हुए ड्रोन हमलों की सीरीज को अंजाम दिया है।

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ईरान की सेना ने एक बयान में कहा कि ड्रोन हमलों में जॉर्डन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य कर्मियों के शिविरों के साथ-साथ लॉजिस्टिक उपकरणों और सहायता सुविधाओं के ठिकानों को तथा बहरीन में अमेरिकी सैन्य उद्योगों को सहायता देने वाली सबसे बड़ी एल्युमीनियम स्मेल्टर को निशाना बनाया गया।

सेना ने कहा कि ये ऑपरेशन अमेरिकी सेना की आक्रामक कार्रवाइयों और ईरान के बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों के जवाब में किए गए थे। इन हमलों में औद्योगिक क्षेत्र और इस्फ़हान तथा खुज़ेस्तान में स्थित स्टील कॉम्प्लेक्स जैसी प्रमुख सुविधाएं, साथ ही करज में बी1 पुल भी शामिल थे।
 
बयान के अनुसार, ईरानी सेना ने जॉर्डन में अमेरिकी सेना के लॉजिस्टिक उपकरणों के गोदामों, सहायक सुविधाओं और आवास केंद्रों को निशाना बनाया। साथ ही कुवैत के कैंप आरिफजान में तैनात अमेरिकी बख्तरबंद ब्रिगेड की एक मशीनीकृत बटालियन के ठिकाने और बहरीन में सबसे बड़े एल्यूमीनियम स्मेल्टर को भी निशाना बनाया, जिसे अमेरिकी सैन्य उद्योगों का समर्थक माना जाता है।

बयान में बताया गया कि कैंप आरिफजान विभिन्न बख्तरबंद वाहनों के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिकल बेस के रूप में कार्य करता है, और यहां कई अमेरिकी यूनिटें तैनात हैं, जिनमें इन्फैंट्री ब्रिगेड और फील्ड सपोर्ट फोर्स शामिल हैं।

इसमें एल्युमीनियम बहरीन को उसकी सबसे बड़ी एल्युमीनियम स्मेल्टर के रूप में भी पहचाना गया है, और इसे अमेरिकी उद्योगों के साथ रणनीतिक सहयोग रखने वाला तथा अमेरिकी सैन्य विनिर्माण को समर्थन देने में भूमिका निभाने वाला बताया गया है।

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