अपना चूल्हा, अपना ईंधन

विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करते रहना ही नहीं है

अपना चूल्हा, अपना ईंधन

पीएनजी को बढ़ावा देना अच्छा कदम है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में यह कहकर देशवासियों को एकता का संदेश दिया है कि 'चुनौतीपूर्ण समय है ... हमें एकजुट होकर इससे बाहर निकलना है।' अगर देशवासी ठान लें तो यह समय बहुत आसानी से निकल सकता है। प्रधानमंत्री ने सत्य कहा कि 'यह 140 करोड़ देशवासियों के हित से जुड़ा विषय है, जिसमें स्वार्थ भरी राजनीति का कोई स्थान नहीं है।' इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को मिलकर समाधान का रास्ता निकालना चाहिए। आज समस्या पर तो खूब बातें हो रही हैं। समाधान का जिक्र कौन कर रहा है? विपक्ष का काम सरकार की आलोचना करते रहना ही नहीं है। जहां जरूरत हो, रचनात्मक समाधान भी पेश करना चाहिए। हाल में सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें सामने आईं, उन्हें देखकर स्पष्ट होता है कि कई लोग अफवाहों से बहुत ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें सिर्फ अपनी सुविधाओं की चिंता है। उनकी वजह से अन्य लोग परेशान होते हैं तो होते रहें! उन्हें कोई परवाह नहीं है। कोई व्यक्ति पेट्रोल पंप पर सैकड़ों लीटर क्षमता की टंकी लेकर आ रहा है, तो कोई ज्यादा से ज्यादा गैस सिलेंडर इकट्ठे कर रहा है। क्या इस तरह हम चुनौती का सामना करेंगे? अगर सब लोग धैर्य से काम लेते, ईंधन की जमाखोरी नहीं होती तो किसी को समस्या नहीं होती। भविष्य में भारत में ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसके लिए केंद्र सरकार को बहुत बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिए। अगर हर घर सौर ऊर्जा से जुड़ जाए तो खाना बनाने के लिए अतिरिक्त बिजली बहुत आसानी से बन सकती है। देश में आठ से दस महीने अच्छी-खासी धूप पड़ती है। अगर इसका भरपूर इस्तेमाल किया जाए तो घरों में गैस सिलेंडरों की जरूरत बिल्कुल घट सकती है।

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इस गैस का इस्तेमाल उद्योगों में किया जा सकता है। पीएनजी को बढ़ावा देना अच्छा कदम है। हालांकि इसके लिए पाइपलाइन बिछाने में काफी समय लग सकता है। उसके बाद कनेक्शन करने, मीटर लगाने, बिल देने जैसी प्रक्रियाएं होती हैं। गांवों और छोटे शहरों में पीएनजी पहुंचाने में कई मुश्किलें आ सकती हैं। ढाणियों और दुर्गम इलाकों तक इसे पहुंचाना बहुत खर्चीला साबित होगा। वहीं, सौर ऊर्जा का इस्तेमाल कई बाधाओं को दूर कर सकता है। एक बार सोलर पैनल लगाने के बाद अच्छी गुणवत्ता का इंडक्शन स्टोव गैस सिलेंडर का मजबूत विकल्प बन सकता है। गांवों से लेकर महानगरों तक इस क्रांति की जरूरत है। हमारा देश इतना सक्षम और समर्थ होना चाहिए कि हमें रसोईघर के ईंधन के लिए विदेशों की ओर न देखना पड़े। हमें समुद्र की ओर टकटकी न लगानी पड़े कि कब कोई जहाज गैस लेकर आएगा और लोगों को तसल्ली होगी। अपने चूल्हे में अपना ईंधन होना चाहिए। कई लोग सोशल मीडिया पर शिकायत कर रहे हैं कि 'ईश्वर ने हमारे साथ अन्याय किया ... अगर हमारे देश में भी गैस के भंडार होते तो रसोईघर में ईंधन की कोई दिक्कत ही न होती।' वास्तव में यह शिकायत निराधार है। ईश्वर ने हमारे देश पर विशेष कृपा की है। यह अवतारों और देवी-देवताओं की भूमि है। हमारे पास गैस से ज्यादा कीमती चीज है, वह भी अथाह! इस दिव्य भूमि पर सूर्यदेव अपनी असंख्य किरणें बरसा रहे हैं। विदेशों में गैस के भंडार सीमित हैं। उनका पता लगाने में करोड़ों डॉलर खर्च हो जाते हैं। सूर्यदेव की किरणें तो ऊर्जा का अनंत भंडार हैं। उन्हें ढूंढ़ने की जरूरत ही नहीं है। ईश्वर ने हमारे लिए इतनी बड़ी व्यवस्था कर रखी है! अगर हमने इस ओर ध्यान नहीं दिया, इस वरदान का सदुपयोग नहीं किया तो कौन जिम्मेदार है? दुनिया में कई देश इतनी धूप के लिए तरसते हैं, जबकि हमें नि:शुल्क मिल रही है! अगर आजादी के बाद सरकारें सौर ऊर्जा में रुचि लेतीं, वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करतीं तो आज किसी रसोईघर, होटल, रेस्टोरेंट और ढाबे को ईंधन का इंतजार ही न करना पड़ता।

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