खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं: राघव चड्ढा
'आप' के फैसले पर प्रतिक्रिया दी
Photo: raghavchadhaca FB Page
नई दिल्ली/दक्षिण भारत। 'आप' के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी द्वारा सदन में बोले जाने पर रोक लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए कहा, 'खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।'
उन्होंने कहा, 'मुझे जब-जब संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं। शायद ऐसे टॉपिक उठाता हूं, जिन्हें आम तौर पर संसद में नहीं उठाया जाता। क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया, कोई गलत कर दी?'राघव चड्ढा ने कहा, 'ये सवाल आज मैं इसलिए पूछ रहा हूं, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को यह कहा है कि राघव चड्ढा के संसद में बोलने पर रोक लगा दी जाए। जी हां, आम आदमी पार्टी ने संसद को यह सूचित किया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने का मौका न दिया जाए।'
राघव चड्ढा ने कहा, 'अब कोई भला मेरे बोलने पर रोक क्यों लगाना चाहेगा? मैं तो जब बात करता हूं, देश के आम आदमी की बात करता हूं। एयरपोर्ट पर मिल रहे महंगे खाने की बात रखी, जोमैटो-ब्लिंकिट के डिलिवरी राइडर्स की समस्याएं रखीं, खाने में मिलावट का मुद्दा उठाया, टोल प्लाजा लूट से लेकर बैंक चार्ज लूट पर बात की।'
राघव चड्ढा ने कहा, 'यहां तक कि मिडल क्लास पर टैक्स के बोझ से लेकर कॉन्टेंट क्रिएटर्स पर स्ट्राइक क्यों की जाती है, टेलीकॉम कंपनियां कैसे 12 महीनों में हमसे 13 बार रिचार्ज करवाती हैं, डेटा रोल ओवर नहीं देती हैं, रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग रोक देती हैं, जैसे तमाम मुद्दे मैंने सदन में उठाए।'
राघव चड्ढा ने कहा, 'ये मुद्दे उठाने के बाद देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ, लेकिन इससे आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ? भला कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? कोई मेरी आवाज को क्यों बंद करना चाहेगा? खैर, आप लोग मुझे अनलिमिटेड प्यार देते हैं। मैं जब-जब आपके मुद्दे उठाता हूं, आप मुझे सपोर्ट करते हैं, शाबाशी देते हैं, मेरा हौसला बढ़ाते हैं। मैं आपको कहना चाहता हूं- धन्यवाद।'
राघव चड्ढा ने कहा, 'ऐसे ही मेरा हाथ और मेरा साथ थामे रखिएगा, छोड़िएगा मत। मैं आपसे हूं और मैं आपके लिए हूं। जिन लोगों ने आज संसद में बोलने का अधिकार मुझसे छीन लिया, मुझे खामोश कर दिया, मैं उन्हें भी कुछ कहना चाहता हूं। मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।'


