दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लकीर बड़ी करें: प्रधानमंत्री
मोदी ने कर्मयोगी साधना सप्ताह के दौरान टिप्पणी की
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कर्मयोगी साधना सप्ताह के दौरान टिप्पणी की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि कर्मयोगी साधना सप्ताह के इस आयोजन के लिए आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। 21वीं सदी के इस कालखंड में तेजी से बदलतीं व्यवस्थाएं, तेजी से बदलती दुनिया और उनके बीच उसी रफ्तार से आगे बढ़ता हमारा भारत। इसके लिए सार्वजनिक सेवा को समय के अनुरूप निरंतर अपडेट करना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कर्मयोगी साधना सप्ताह उसी प्रयास की एक अहम कड़ी है। आप सभी परिचित हैं कि आज गवर्नेंस के जिस सिद्धांत को लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं, उसका मूलमंत्र है 'नागरिक देवो भवः'। इस मंत्र में समाहित भावना के साथ आज सार्वजनिक सेवा को ज्यादा केपेबल और नागरिकों के लिए ज्यादा संवेदनशील बनाने पर फोकस किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी सोच ने क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) को जन्म दिया। आज सीबीसी के स्थापना दिवस पर ये नई शुरुआत और आईगॉट मिशन कर्मयोगी की सफल भूमिका हमारे प्रयासों को कई गुना ऊर्जा दे रही है। मुझे विश्वास है कि इन प्रयासों से हम आधुनिक, सक्षम, समर्पित और संवेदनशील कर्मयोगी की टीम बनाने में सफल होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सफलता का एक बड़ा सिद्धांत यह भी है कि दूसरों की लकीर छोटी करने के बजाय अपनी लकीर बड़ी करें। हमारे देश में आजादी के बाद से कई तरह की संस्थाएं अलग-अलग फोकस के साथ काम कर रही थीं, लेकिन आवश्यकता थी एक ऐसी संस्था की, जिसका फोकस क्षमता निर्माण हो, जो सरकार में काम करने वाले हर कर्मचारी, हर कर्मयोगी की सामर्थ्य बढ़ाए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें हमारे वर्तमान प्रयासों को भविष्य के एक बड़े कैनवास पर देखना चाहिए। साल 2047 में विकसित भारत, यही हमारा कैनवास है, यही हमारा लक्ष्य है। जब हम लर्निंग की बात करते हैं तो आज के परिपेक्ष्य में टेक्नोलॉजी का महत्त्व बहुत बढ़ जाता है। आप सब देख रहे हैं कि बीते 11 वर्षों में शासकीय और प्रशासकीय कामों में किस तरह टेक्नोलॉजी का इंटीग्रेशन हुआ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने गवर्नेंस और डिलिवरी से लेकर अर्थव्यवस्था तक टेक क्रांति की ताकत देखी है। अब एआई की दस्तक के बाद यह बदलाव और तेज होने वाला है, इसलिए टेक्नोलॉजी को समझना और उसका उपयोग करना अब सार्वजनिक सेवा का जरूरी हिस्सा बन चुका है।


