अब जनता की बारी
रुपए में काफी गिरावट आ चुकी है
'स्वदेशी' अपनाने का संकल्प लें
रुपए में गिरावट थामने के लिए आरबीआई ने कई कदम उठाए हैं। अब जनता की बारी है। हमें भी ऐसे कदम उठाने होंगे, जो रुपए को मजबूती दें। जब डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता है तो भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे आयात बिल बढ़ता है और महंगाई में वृद्धि होती है। ईरान के साथ अमेरिका-इज़राइल के युद्ध के कारण रुपए में पहले ही काफी गिरावट आ चुकी है। इसे रोकने के लिए देशवासियों को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे। होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अशांति की वजह से तेल-गैस की निर्बाध आपूर्ति में व्यवधान आया है। हालांकि सरकार अन्य विकल्पों पर काम कर रही है। आपूर्ति प्रणाली पर दबाव कम करने के लिए तेल और गैस की खपत कम करनी होगी। यहां ग्रामीण क्षेत्र के लोग महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उनके पास ईंधन के अनेक विकल्प हैं। अगर वे कुछ दिनों के लिए इनका इस्तेमाल करें तो विदेशी मुद्रा की बचत होगी। साथ ही, शहरों में आपूर्ति तेज होगी। इससे औद्योगिक गतिविधियों में मदद मिलेगी। इन सबका नतीजा रुपए के प्रदर्शन में दिखाई देगा। इस समय हमें विदेश की अन्य चीजों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। जहां तक संभव हो, स्वदेशी चीजें खरीदें। ध्यान रखें, स्थानीय व्यक्ति से स्वदेशी चीज खरीदेंगे तो उसका फायदा किसी-न-किसी रूप में आपको जरूर मिलेगा। वहीं, विदेशी कंपनियों के खजाने में गया रुपया आपको कोई फायदा नहीं देगा। गर्मियों का मौसम आ गया है। हर साल इस समय विदेशी कंपनियों के शीतल पेय की बिक्री में उछाल आता है। इस साल संकल्प लें कि नींबू, पुदीना, छाछ, लस्सी, सत्तू और शर्बत आदि का सेवन करेंगे। इन पर खर्च किया गया रुपया अर्थव्यवस्था को ताकत देगा। ये चीजें विदेशी शीतल पेय की तुलना में काफी सस्ती तो हैं ही, स्वास्थ्यवर्द्धक भी हैं।
गर्मियों की छुट्टियों में कई लोग विदेश घूमने का कार्यक्रम बनाते हैं। इसमें काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर इस साल विदेश जाने के बजाय अपने देश में घूमने का कार्यक्रम बनाएं तो बहुत अच्छा रहेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। अपने देश में पर्यटन संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। ब्याह-शादियों में कपड़ों की मांग बहुत होती है। कई लोग विदेशी ब्रांड के कपड़े पहनकर गर्व महसूस करते हैं। हालांकि गर्व की बात तो तब होती, जब हम लोग स्वदेशी कपड़े पहनें। इसी तरह जूते, चप्पल, परफ्यूम, मोबाइल फोन जैसी चीजें स्वदेशी लेने की आदत डालें। जब दुकानदार से कहेंगे कि 'स्वदेशी ही चाहिए', तो वे स्वदेशी माल को प्राथमिकता देंगे। समस्त देशवासी यह संकल्प लें तो महीनेभर में ही असर दिखाई देना शुरू हो जाएगा। रुपया जोरदार वापसी करेगा। अक्सर आम लोगों को रुपए में गिरावट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। जब उन्हें बताया जाता है तो उनकी प्रतिक्रिया कुछ ऐसी होती है- 'हमें डॉलर से क्या मतलब है? कहां गिरा है रुपया? हमारी वजह से कैसे गिरा है?' उन्हें मुद्रा में गिरावट आने की वजह के बारे में बताया जाए। इसके अलावा उन तरीकों की जानकारी दी जाए, जो रुपए की मजबूती में योगदान दे सकते हैं। जनता को इसे आंदोलन बनाना होगा। रुपए को वापस मजबूत बनाना होगा। इसमें कुछ योगदान नेतागण भी दें। वैसे, उनकी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है। वे महात्मा गांधी, भगत सिंह जैसे महापुरुषों की बातें तो खूब करते हैं, लेकिन उनके जैसी सादगी नहीं अपनाते। गांधीजी ने स्वदेशी को स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बना दिया था। क्या आज सभी दलों के नेता मिलकर कुछ ऐसा नहीं कर सकते, जिससे अपने देश के उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिले और अपनी मुद्रा मजबूत हो? कुछ नेता तेल-गैस के मुद्दे पर बयान देते हैं, सरकार को जी भरकर कोसते हैं और अपनी कार में बैठकर चले जाते हैं। अगर वे साइकिल चलाएं, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और थोड़ा पैदल भी चलें, तो उनके शब्दों पर लोग विश्वास करेंगे। कोरे बयानों से कुछ नहीं होगा।

