बांग्लादेशी आगबबूला क्यों?

भारत की सीमाओं की सुरक्षा करना केंद्र सरकार का कर्तव्य है

बांग्लादेशी आगबबूला क्यों?

अब भारत और ज्यादा घुसपैठियों का बोझ नहीं उठा सकता

जब से पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनी है, बांग्लादेशी कट्टरपंथियों की नींदें उड़ गई हैं। उन्होंने ढाका में जिस तरह विरोध प्रदर्शन करते हुए भारतीय नेताओं के खिलाफ टिप्पणियां कीं, उससे स्पष्ट होता है कि वहां कट्टरपंथियों की बेचैनी बढ़ गई है। भारत की सीमाओं की सुरक्षा करना केंद्र सरकार का कर्तव्य है। अगर भारतीय नेता बांग्लादेश के साथ लगती सीमा पर बाड़ लगाने और घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कहते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। प. बंगाल सरकार बीएसएफ को जमीन सौंपने की दिशा में कदम उठा चुकी है। कानून का पालन करने वाले किसी भी व्यक्ति को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए। भारत को अधिकार है कि वह हर उस व्यक्ति को अपनी जमीन पर कदम रखने से रोके, जिसके पास आधिकारिक अनुमति नहीं है। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार एम हुमायूं कबीर की यह टिप्पणी घुसपैठियों का खुला समर्थन है कि 'बांग्लादेश कंटीले तारों से नहीं डरता। जहां हमें बोलने की जरूरत होगी, हम बोलेंगे।' इसमें डरने-डराने की बात कहां से आ गई? बांग्लादेश भी अपनी जमीन पर बाड़ लगाने के लिए स्वतंत्र है। अगर कोई व्यक्ति वहां गैर-कानूनी ढंग से कदम रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इस पर किसी को आपत्ति नहीं है। पड़ोसी देश के वरिष्ठ अधिकारी यह कहकर घुसपैठियों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर ज्यादा मानवीय रवैया अपनाना होगा। भारत अब तक 'ज्यादा मानवीय रवैया' ही अपनाता रहा है। इसका नतीजा यह निकला कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के झुंड के झुंड हमारे देश में आकर मौज कर रहे हैं। क्या ज्यादा मानवीय रवैए का यह मतलब है कि किसी भी बांग्लादेशी घुसपैठिए को इस ओर आने की पूरी आजादी दे दी जाए?

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बांग्लादेशी सरकार और नागरिकों को समझना चाहिए कि अब भारत और ज्यादा घुसपैठियों का बोझ नहीं उठा सकता। भारत की अपनी जनसंख्या ही बहुत ज्यादा है। भारतीय नागरिकों तक मूलभूत सुविधाएं बड़ी मुश्किल से पहुंच रही हैं। ऐसे में बांग्लादेशियों का बोझ उठाना संभव नहीं है। इसलिए जो लोग बांग्लादेश की ओर से घुसपैठ करते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, जो बांग्लादेशी गलत तरीके से पहले यहां आकर बस चुके हैं, उन्हें वापस स्वदेश भेज देना चाहिए। बांग्लादेशियों के लिए रोटी, रोजगार और आवास का प्रबंध करना भारत सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। उन्हें बांग्लादेशी सरकार से इनकी मांग करनी चाहिए। इस पड़ोसी देश में जो लोग पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत से आगबबूला हो रहे हैं, उन्हें अपने घर के हालात पर ध्यान देना चाहिए। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था रसातल में चली गई है। कई इलाकों में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है। उसे भारत को धन्यवाद कहना चाहिए कि मुश्किल समय में मदद का हाथ बढ़ाया, अन्यथा बांग्लादेश में औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ जातीं। अगर बांग्लादेशी सरकार यह चाहती है कि घुसपैठियों और तस्करों की निर्बाध आवाजाही रहे, तो अब ये गतिविधियां नहीं चलेंगी। हाल में बीएसएफ ने दो बांग्लादेशी तस्करों को ढेर किया था। ऐसी कार्रवाई जरूरी है। घुसपैठ और तस्करी जैसे काम स्थानीय मददगारों के बगैर नहीं हो सकते। सरहदी इलाकों में ऐसे लोगों का मजबूत नेटवर्क होता है। पुलिस, बीएसएफ और खुफिया एजेंसियों को मिलकर इस नेटवर्क को तोड़ना होगा। जो लोग इसमें लिप्त पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी होगी। जब सरहद पार यह बात समझ में आ जाएगी कि 'घुसपैठ करना बहुत महंगा पड़ सकता है' और 'तस्करी करने पर जान गंवानी पड़ सकती है', तो ये गतिविधियां धीरे-धीरे बंद हो जाएंगी।

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