नकल और मिलावट का कपट धंधा
लोगों को हर चीज शुद्ध मिले
जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
भारत में नकली और मिलावटी चीजों का कपट धंधा धड़ल्ले से जारी है। ऐसे लोग चंद रुपयों के लिए जनता की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो देखकर अब तो मन में सवाल पैदा होता है- क्या कोई ऐसी चीज भी बची है, जो नकली नहीं है या जिसमें कोई मिलावट नहीं है? हाल में दिल्ली पुलिस ने नकली टूथपेस्ट बनाने वाले एक कारखाने का भंडाफोड़ किया था। वहां कच्चे पेस्ट, मशीनों और पैकेजिंग सामग्री से एक मशहूर ब्रांड का नकली टूथपेस्ट बनाया जाता था। तैयार माल को स्थानीय बाजारों में बेच दिया जाता था। उससे किसी के दांत चमकें या न चमकें, कारखाने के मालिक का धंधा जरूर चमक रहा था। मेरठ में दो कारखाने नकली पनीर बनाकर लोगों को स्वाद के साथ बीमारियां परोस रहे थे। जब अधिकारियों ने छापा मारा तो 2,800 किलोग्राम से ज़्यादा नकली पनीर बरामद हुआ। अगर यह कार्रवाई नहीं होती तो इतना 'पनीर' लोगों की थाली में जाता। दूध और घी में मिलावट आम बात हो गई है। विक्रेताओं को लिखना पड़ता है- 'यहां शुद्ध दूध और शुद्ध घी मिलता है।' सवाल है- दूध और घी को 'शुद्ध' लिखने की नौबत ही क्यों आई? मिलावट करने वालों ने विश्वास को इतना कमजोर कर दिया कि अब लोग शुद्धता संबंधी किसी भी दावे को आसानी से स्वीकार नहीं करते। अस्सी और नब्बे के दशक में एक किस्सा (जो काल्पनिक था, लेकिन हकीकत के काफी करीब था) बहुत मशहूर था- एक व्यक्ति किसी दुकान से घी लेकर गया। उससे रोटी चुपड़कर खाते ही उसका पेट खराब हो गया। अगले दिन दुकानदार से शिकायत की। उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा, 'मैंने भूलवश आपको असली घी दे दिया, इसलिए आपका पेट खराब हो गया। अब तक नकली घी खाने से आपके पेट को उसकी आदत हो गई।'
हर साल त्योहारों और शादियों के सीजन में नकली मावा खूब पकड़ा जाता है। फिर भी जालसाज बाज नहीं आते। असली शहद तो अब दुर्लभ हो चुका है। एक व्यक्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह कार से जयपुर जा रहा था। सर्दियों के दिन थे। रास्ते में कुछ लोग 100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी के साथ शहद बेच रहे थे। उनके पास मधुमक्खियों के कुछ छत्ते भी थे। व्यक्ति ने शहद चखा, जो बिल्कुल असली लगा। उसे विश्वास हो गया तो शहद ले लिया। हफ्तेभर बाद पता चला कि बर्तन में ऊपर असली शहद था, नीचे चीनी और अन्य पदार्थों की परत थी। कुछ साल पहले झुंझुनूं में एक फेरीवाले ने शुद्ध घी के नाम पर कई लोगों को चूना लगा दिया था। उसने बर्तन के निचले हिस्से में उबले हुए आलू और ऊपरी हिस्से में असली घी जमा कर रखा था। इसी तरह काली मिर्च में पपीते के बीज, धनिया पाउडर में पशु-अपशिष्ट, मिर्च पाउडर में पिसी हुई ईंट, हल्दी पाउडर में पीला रंग, हींग में चॉक पाउडर की मिलावट वर्षों से हो रही है। यह सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि बहुत बड़ा धोखा है। लंबे समय तक इनका सेवन करने से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। खान-पान संबंधी चीजों की शुद्धता की पहचान करने के कई तरीके हैं। वे प्रारंभिक पहचान के लिए ठीक हैं, लेकिन वैज्ञानिक पुष्टि के लिए लैब टेस्ट ही सही तरीका होता है। आम आदमी के पास न इतने संसाधन हैं और न इतना समय है कि वह एक-एक चीज लेकर लैब के चक्कर लगाता फिरे। यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है कि लोगों को हर चीज शुद्ध मिले। इसके लिए अधिकारी समय-समय पर जांच करें और मिलावट का पता लगाएं। जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

