तमिलनाडु हिंदी थोपे जाने को कभी स्वीकार नहीं करेगा: उदयनिधि स्टालिन

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा

तमिलनाडु हिंदी थोपे जाने को कभी स्वीकार नहीं करेगा: उदयनिधि स्टालिन

Photo: UdhayStalin FB Page

तंजावुर/दक्षिण भारत। तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को भाषा विवाद पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की आलोचना करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य कभी भी तीन-भाषा फॉर्मूला को स्वीकार नहीं करेगा, बल्कि तमिल और अंग्रेजी की दो-भाषा नीति का पालन करेगा।

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यह दावा करते हुए कि केंद्र सरकार तमिलनाडु पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू करने का दबाव डाल रही है, जिससे राज्य पर हिंदी थोपे जाने का रास्ता खुल रहा है, उन्होंने कहा कि एनईपी को स्वीकार करने का मतलब होगा- केंद्र सरकार को तमिलनाडु पर हिंदी थोपने की अनुमति देना।

उदयनिधि ने ज़िले के तिरुवैयारु में द्रमुक उम्मीदवार दुरई चंद्रशेखरन के लिए प्रचार करते हुए कहा, 'हम इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। हम हमेशा तमिल और अंग्रेज़ी की दो-भाषा नीति का पालन करेंगे।'

उन्होंने पार्टी सदस्यों और जनता से अपील की कि वे थिरुवैयारु से छठी बार चंद्रशेखरन की ज़बर्दस्त जीत सुनिश्चित करें। भीड़ के उत्साह के बीच उन्होंने कहा, 'मैं वादा करता हूँ कि अगर आप 23 अप्रैल के चुनाव में उन्हें 50,000 वोटों के भारी अंतर से विजयी बनाते हैं, तो मैं मुख्यमंत्री स्टालिन के सामने उनका मामला उठाऊंगा और उन्हें राज्य मंत्री के पद पर पहुंचाऊंगा।'

इसके अलावा, द्रमुक की युवा शाखा के सचिव ने यह भी आश्वासन दिया कि यदि चंद्रशेखरन को जिताया जाता है, तो वे हर महीने तंजावुर का दौरा करेंगे और लोगों से मिलेंगे।

उन्होंने कहा, 'साल 2021 के चुनाव में हमने तंजावुर ज़िले की आठ में से सात विधानसभा सीटें जीती थीं। इस बार हमें सौ फ़ीसदी जीत सुनिश्चित करनी चाहिए। जैसा कि पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कहते हैं, मैं भी (कावेरी) डेल्टा का ही रहने वाला हूं। इसलिए, अगर आप इस ज़िले से आठ विधायक चुनकर भेजते हैं, तो मैं हर महीने तंजावुर आऊंगा।'
 
उदयनिधि ने अन्नाद्रमुक के महासचिव पलानीस्वामी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें अनुभवहीन बताना गलत है। उन्होंने कहा कि उनके पास पलानीस्वामी जैसा वह अनुभव नहीं है, जिसमें खुद को बनाए रखने के लिए नेताओं के पैरों में गिरना पड़ता है। 

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