इस बात का संतोष है कि वंचित, शोषित और गरीब लोगों के लिए ईमानदारी से काम किया: सिद्दरामय्या

'मेरा इस्तीफा केवल मुख्यमंत्री पद से है, सक्रिय राजनीति से नहीं है'

इस बात का संतोष है कि वंचित, शोषित और गरीब लोगों के लिए ईमानदारी से काम किया: सिद्दरामय्या

Photo: Siddaramaiah.Official FB Page

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से गुरुवार को इस्तीफा देने के बाद सिद्दरामय्या ने अपने 'एक्स' अकाउंट पर लंबी पोस्ट डाली। इसमें उन्होंने अपने सियासी सफर को याद किया। उन्होंने कहा, 'आज मैं लोकभवन गया और राज्यपाल की अनुपस्थिति में उनके विशेष कार्य सचिव को मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया।'

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सिद्दरामय्या ने कहा, 'गांव में जन्म लेकर पला-बढ़ा, मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि एक दिन इस राज्य का विधायक, मंत्री, विपक्ष का नेता और दो बार मुख्यमंत्री बनूंगा। इतना बड़ा सपना सच हो पाया है तो इसका श्रेय बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान को जाता है।'

सिद्दरामय्या ने कहा, 'भगवान बुद्ध, बसवेश्वर, बाबा साहेब और महात्मा गांधी मेरे आदर्श हैं। अपने 48 वर्षों के राजनीतिक जीवन में मुझे इस बात का संतोष है कि मैंने राज्य के वंचित, शोषित और गरीब लोगों के पक्ष में ईमानदारी से काम किया।'

सिद्दरामय्या ने कहा, 'मुझे विधायक दल का नेता चुनकर अब तक मुख्यमंत्री के रूप में जनता की सेवा करने का अवसर देने वाले पार्टी विधायकों का, मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले मंत्रिमंडल सहयोगियों का, अवसर देने वाले पार्टी नेतृत्व — सोनिया गांधी, राहुल गांधी और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे — का, तथा मेरे पूरे राजनीतिक जीवन में मुझे स्नेह, समर्थन और मार्गदर्शन देने वाले कन्नड़वासियों का मैं हमेशा ऋणी रहूंगा।'

सिद्दरामय्या ने कहा, 'संविधान ही मेरा धर्म है और जनता ही मेरे लिए भगवान है। मेरा इस्तीफा केवल मुख्यमंत्री पद से है, सक्रिय राजनीति से नहीं है। मैं अपने जीवन की आखिरी सांस तक सामाजिक न्याय के लिए और संविधान-विरोधी सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ संघर्ष करता रहूंगा। धन्यवाद।'

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